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मन हरा होता।

हरा- भरा यदि धरा होता न चिंता हमें ज़रा होता। साख - साख मुस्कुराते पत्तियों का मन हरा होता। दोस्ती अपनी कायम होती बातों का गर खरा होता। सरकार योगी की न होती तो खेत इतना चरा न होता। चेताया समय से चीन होता संकट इतना बरा न होता। दोहन प्रकृति का न होता जो ज़र्रा-ज़र्रा इतना जरा न होता। 'दरिया'
रामानुज "दरिया" http://bit.ly/2E3f9ff
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