Posts

Showing posts from August, 2020

लारा (एक प्रेम कहानी) भाग 4

Image
  Behind the Scenes Love Story ❤ (Part 4) कभी-कभी सबसे मुश्किल काम… बस एक message भेजना होता है सोमा के फोन में अब भी वही chat list थी। बस एक नाम अब वहाँ नहीं था। राम ने कुछ नहीं किया था — न block किया, न unfriend। बस सोमा ने खुद ही उस नाम को हटा दिया था। गुस्से में। उस रात। और आज वही गुस्सा पछतावा बनकर सीने में बैठा था। वो कई बार WhatsApp खोलती, ऊपर search bar तक जाती, उँगली वहीं रुक जाती। फिर बिना कुछ टाइप किए screen बंद कर देती। जैसे नाम लिखते ही सब कुछ सच हो जाएगा। रात को सोने से पहले उसकी एक पुरानी आदत थी — "Good night" लिखकर phone side में रखना। अब भी वो वही करती थी। बस message नहीं भेजती थी। typing box खुलता… दो-तीन शब्द बनते… उँगलियाँ रुक जातीं। फिर backspace। खाली। हर रात। कभी-कभी वो खुद से बचने के लिए Facebook खोल लेती। राम की नई पोस्ट ढूँढती। पढ़ती। scroll करती। लेकिन हर पोस्ट के बाद कुछ सेकंड तक screen पर ही अटकी रहती। नीली रोशनी आँखों में चुभती थी — पर वो हटाती नहीं थी नज़र। जैसे शब्द खत्म हो गए हों, पर असर अभी बाकी हो। एक दिन उसने kitchen में चाय बनाई। दो कप निक...

जिंदगी का बोझ अब मुझसे ढोया नही जाता |

Image
जिंदगी का बोझ अब मुझसे ढोया नही जाता सूख चुके आंशु की अब रोया नही जाता | उतर गया भूत सर से मेरे अपनों का भी कि अपनों के लिए बीज बोया नही जाता |   जिंदगी का अरमान तो सिर्फ तोड़ती पत्थर है मार कर खुद को खुद से अब रोया नहीं जाता |   कीचड़ ही कीचड़ हो जहाँ कमल खिला करते थे जरुरत से ज्यादा खुद को डुबोया नही जाता |   मिट चुकी लकीरें हाथों से किस्मत की कोरोना कि बार - बार हाथों को मुझसे धोया नहीं जाता |   वादा था एक उम्र साथ निभाने का इतना जल्दी मुझसे किसी को खोया नहीं जाता |   गर लायक है जिंदगी जीने की तो जियो दरिया हर किसी के कंधे पे सर रख के रोया नहीं जाता |   गर तुम्हारी है तो तुम्हारी होकर ही रहेगी   हर दर को आंशुओं से भिगोया नहीं जाता |           “दरिया”

न कभी हम मिल पायेंगे।

Image
  न दाग दामन में लगने पायेंगे भले जान जिस्म से चले जायेंगे न कभी हम मिल पायेंगे। नयन बस नीर बहायेंगे नज़र नजर को तरस जायेंगे न कभी हम मिल पायेंगे। इरादे सारे बदल जायेंगे वादे सब भूल जायेंगे। न कभी हम मिल पायेंगे। नकाब चेहरे पर आयेंगे हम इतने फरेबी हो जायेंगे। न कभी हम मिल पायेंगे। वादे रात को करके आयेंगे सुबह घोल चाय में पी जायेंगे न कभी हम मिल पायेंगे। त्योहार सपनों में आयेंगे हम अपनों के लिए गिड़गिड़ाएंगे न कभी हम मिल पायेंगे।

ओ भी गुजर गयी पास से।

Image
 आस जगी थी इक खास से ओ भी गुजर गयी पास से। जो भी आया सांत्वना दे गया न रूबरू हुआ मेरे अहसास से। भले न चल सके दो कदम साथ पर मिली थी अंदाज़-ए-झकास से। अभी चंद बातें ही तो हुयी थी उससे चला गया मैं अपने होशोहवास से। कल चाँद भी शर्मा गया शाम को छत पर गयी थी ,अंदाज़-ए-खास से। उसके सिवा न अब कोई दिल मे आये धड़कनों में मिल जाये मेरी सांस से। तब भी खाली था और आज भी हो गये दिल-ए-अहसास बक़वास से।

मन मीत मिल जाये।

Image
 सावन झूम कर आये रातें भी गीत सुनायें मन मीत मिल जाये। कोयल भी कूक लगाये जीवन आनंदित हो जाये मन मीत मिल जाये। तकलीफें भी तरस जाये खुशियां जीत जायें मन मीत मिल जाये। पुष्प राहें सजायें चाँद गले लग जाये मन मीत मिल जाये। बदन भी दमक जाये चमक आंखों में आये मन मीत मिल जाये। पर ख्वाबों में लग जाये बल होंसले को मिल जाये मन मीत मिल जाये। मंज़िल भी राह निहारे राहें मंज़िल हो जायें मन मीत मिल जाये। बिंदिया चूड़ी कंगन मिल कर सेज़ सजायें मन मीत मिल जाये।

बस भाव बदल गये हैं।

Image
 ओ बातें अब नहीं होती न प्लीज़ प्लीज़ न सॉरी न ऑनलाइन होने की चिंता न गुड नाईट की बारी न लफड़े न झगड़े न दोस्ती न यारी। रह गयी तो बस उदास जिंदगी और समझदारी न मॉर्निंग वॉक पे आना न घंटों बतियाना न चिढ़ना न चिढ़ाना बस पैसे की बात और तनख्वाह सारी। रिस्ते भी वही हैं बस भाव बदल गये हैं पहले बातों बातों जितना भाव खाते थे उतना तो सुबह उठ कर अब कुल्ला करते हैं बचपन छूट गया पड़ गयी जवानी भारी। "दरिया"

तुम भी तो अब चले जाओगे।

Image
 इतना एटीट्यूड दिखाकर तुम लगने किसके गले जाओगे तुम भी तो अब चले जाओगे। रे - टे टर-टर जैसी हरकतों से कबतक फुसला कर बहलाओगे। तुम भी तो अब चले जाओगे। इस भ्रम में मत रहना दरिया की हुकूमत तुम्हारी ही चलेगी पुरानी सारी बखरियां तोड़कर अब तो मकान नये बनाओगे तुम भी तो अब चले जाओगे। "दरिया"

लगता है की इश्क मेरा अब।

Image
  करना चाहूं कितना भी गलत ज़मीर खबरदार ही कर देगा। लगता है की इश्क मेरा अब मुझे बरबाद ही कर देगा। करने से नहीं ग़ालिब यहां कहने से ही बदनाम होगा गलियां इश्क की है "दरिया" आगाज से ही अंजाम होगा। रिश्ते की सीमायें तो सिर्फ हमे ही पता है साहब दूर से देखने वाला यहां जाने क्या क्या इल्जाम देगा। "दरिया"

कुछ बदमाशियां तो जोबन भी करता है।

Image
  जरूरी नहीं कि गलतियां आंखों की हो मीठी सरारतें अब दिल भी करता है। हर बार बुरा ओ दुपटटा ही नहीं होता कुछ बदमाशियां तो जोबन भी करता है। पनाह देना किसी को,दिल में बुरी बात नहीं ज्यादातर इशारे तो अब बदन ही करता है। यौवन की आवाज़ तो अलग सी होती है ज्यादा नख़रे तो अब पैर ही करता है।

न दर्द किसी को बता देना।

Image
  खुदी से खुद को समझा लेना न दर्द किसी को बता देना। बेशर्म हो जायें आंखें रोते-रोते वज़ूद खुद का खुद से मिटा देना। सुधारो की जब तक सुधार सकते हो बेकाबू हालात से हाथ छुड़ा देना। समझदारी है कि अब स्वार्थी हो जाओ निःस्वार्थ जिंदगी से खुद को हटा देना।

क्यूँ ख़्वाब को ख्वाब रहने दिया जाये।

Image
एक हौंसला और 'पर' को दिया जाये क्यूँ ख़्वाब को ख्वाब रहने दिया जाये।   रूख हवा का भी मोड़ सकती हो तुम यूं जुल्फों को जो खुला रहने दिया जाये। ठान लो, की ऊंचाइयां कमतर दिखेंगी क्यू न सीढियां एक एक कर चढ़ा जाये। तमाम उम्र निकल ही जाती है सोंचने में क्यू न इसे कल पर छोड़ दिया जाये। यकीं मानो चाँद राहें निहारेगा आपकी क्यूं न तारों को आज समेट लिया जाये। थक गये हो गर अपनों के लिये जीते-जीते क्यूं न एक बार अपने लिये जिया जाये। गर तसल्ली नहीं मिलती अपने कर्मों से क्यूं न इक बार राहें बदल लिया जाये। "दरिया"

रह पाये कौन।

Image
  मुश्किलों का बाजार इतना गरम हो वहसी दुनिया में खुश रह पाये कौन। सिस्टम ही भ्रष्टाचार की देन हो ईमानदार बनकर रह पाये कौन लगी हो लत नशे की गर "दरिया" जली सिगरेट फिर बुझाये कौन। परिणाम गर भयावह हो इश्क का फिर नयना से नयन लड़ाये कौन। हर लें हर बाधाओं को हरि भी पर इतना जल उन्हें चढ़ाये कौन। स्वार्थी होने का अपना अलग मजा है तुझे निःस्वार्थ अब दूध पिलाये कौन। खामोशी भी कांप जाती है मेरी सन्नाटे से यहां उबर पाये कौन। दिल लगाना भी तो गुनाह है जनाब यही बात तुझे बार - बार बताये कौन। तेरा आना और जाना दोंनो समान हो फिर साथ रह कर स्वांग रचाये कौन। मालूम हो तेरी चंचलता भरी हैवानियत स्वर्ग सी जिंदगी जहन्नुम बनाये कौन। जी चाहता है कि सिरहने सर रख दूं वक्त को इतना जाया कर पाये कौन। जरूरत नहीं तुझे मेरी तो कोई बात नि हर बार अपना होने का अहसास कराये कौन।

चली गयी।

Image
तू आकर ऐसे चली गयी जिंदगी फिर से छली गयी तड़पते जिस्म से जैसे आज आत्मा चली गयी सौदा इश्क का किया उसने बाजार-ए-हुस्न में चली गयी वजूद खुद का मिटाकर दरिया नाल-ए- नदी गयी।

अहसास।

Image
दूर रह कर भी पास हो गए थे जाने कैसे इतना खास हो गए थे। रह गये कुछ लम्हे यादों के लिए जी कर जिन्हें हम साथ हो गए थे। वक्त है ,कि फासले ही फासले है वक्त था,साथ में दो-दो हाथ हो गए थे।