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Showing posts from March, 2020

लारा (एक प्रेम कहानी) भाग 4

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  Behind the Scenes Love Story ❤ (Part 4) कभी-कभी सबसे मुश्किल काम… बस एक message भेजना होता है सोमा के फोन में अब भी वही chat list थी। बस एक नाम अब वहाँ नहीं था। राम ने कुछ नहीं किया था — न block किया, न unfriend। बस सोमा ने खुद ही उस नाम को हटा दिया था। गुस्से में। उस रात। और आज वही गुस्सा पछतावा बनकर सीने में बैठा था। वो कई बार WhatsApp खोलती, ऊपर search bar तक जाती, उँगली वहीं रुक जाती। फिर बिना कुछ टाइप किए screen बंद कर देती। जैसे नाम लिखते ही सब कुछ सच हो जाएगा। रात को सोने से पहले उसकी एक पुरानी आदत थी — "Good night" लिखकर phone side में रखना। अब भी वो वही करती थी। बस message नहीं भेजती थी। typing box खुलता… दो-तीन शब्द बनते… उँगलियाँ रुक जातीं। फिर backspace। खाली। हर रात। कभी-कभी वो खुद से बचने के लिए Facebook खोल लेती। राम की नई पोस्ट ढूँढती। पढ़ती। scroll करती। लेकिन हर पोस्ट के बाद कुछ सेकंड तक screen पर ही अटकी रहती। नीली रोशनी आँखों में चुभती थी — पर वो हटाती नहीं थी नज़र। जैसे शब्द खत्म हो गए हों, पर असर अभी बाकी हो। एक दिन उसने kitchen में चाय बनाई। दो कप निक...

आस्तीन सांप की।

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उनको हो जाने दो राख की जो परवाह न करे आपकी। यकीं मानो , मिट गया है ओ जिसने सुनी न माँ बाप की। बात मानों तुम पाल लो नाग को पर न पालो आस्तीन सांप की। कर लो कुछ सद्कर्म भी प्यारे वर्ना असर न करेगी हरि जाप की बस चाह लो एक बार जो सनम मिट जाएंगी दूरियां दिलों के नाप की। मिल जाये जिंदगी उसे भी बच्चा गोद ले लो किसी अनाथ की। 'दरिया'

अदभुत नज़ारा।

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मैं तो बस यूं ही बालकनी में खड़ा था लेकिन अचानक से मेरी नजर जब उस तरफ गई तो मैं चौंकन्ना स रह गया ओ अदभुत नजारा जो मैं शायद पहली बार देख रहा था ओ भी इतना करीब से ।ओ मूड बना रहा था या बना रही थी यह तो मैं ठीक से कन्फर्म नहीं हूँ लेकिन एक एक स्टेप जो एक एक करके खोल रहा था और उससे बनने वाली ओ छबि क्या कहना जिसे भगवान ने इतना सारा कुछ दिया हो उसको फिर किस चीज़ की कमी हो सकती है भला।अपनी मस्ती में झूम झूम कर प्रकृत के भविष्य का वर्णन जिस तरह कर रहा था कोई कवि या लेखक क्या खाक ऐसा कर सकता है और जो एक बार घूम जाता तो पूरा मौसम झूम उठता ये कोई कहने वाली बात नही है इसका जीता - जागता उदाहरण है कि शाम को means अभी खूबसूरत रिम - झिम बारिस धरा के बदन को भिगो रही थी। मौसम का यह पूर्वानुमान शायद इससे बेहतर कोई लगा सकता हो अगर हम गूगल और विज्ञान की बात न करें तो। एक मोर जो जुल्फ रूपी अपने पंख को जिस मस्ती में लहराता और नाच रहा था देख के मेरा ही नहीं बल्कि वहाँ मौजूद सभी लोग मूरीद हो गए। टक - टकी लगा के सब बस उसे ही देख रहे थे जो खुले दिल से मौसम को न्योता दे रहा था। यह वही मोर है साहब जिसे भारत सरक...

Happy होली।

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दिलों में रंगत नई है आई खुशियों की सौगात ले आई आओ मिलकर मनाते है सब त्योहार रंगों की जो आई होली की हार्दिक बधाई। न मिलने का कोई मलाल रहे बस चेहरा खुशी से लाल रहे हम मस्ती में खूब झूमते रहें चारों तरफ बस गुलाल रहे। न दिलों में अब बवाल रहे न आंखें किसी पर लाल रहें इस तरह घुल मिल कर रहें हम जैसे रंगों में मिलकर गुलाल रहे।        'दरिया'

जो खास है ओ यूं ही आम नहीं होता।

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जो खास है ओ यूं ही आम नहीं होता दिल में जगह बना पाना आसान नहीं होता। आना जाना तो रश्म-ए-रिवाज़ है प्यारे दिल को घर बना पाना आसान नहीं होता। एक चेहरा जो नजरों से ओझल होता नहीं चेहरे पे खुद को मिटा पाना आसान नही होता। 'दरिया'

यादों के संग - संग।

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लट छितरे बिखरे से परे  हैं जैसे सागर साहिल से लरे हैं नाक पे पड़े हैं नथिया बनकर बालों में सजे हैं गजरा बनकर चंचल सी यह पवन चली है जैसे दरिया खुशबू की बही है कंचन सी यह देह तुम्हारी केशु से अंग सजे सवंरे हैं मोती से आज नहायी हुई हो  य लिप्टिस के सारे फूल झरे हैं ।।        "दरिया"

मुझे तो होश ही न रही।

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जब पलकों के शिल शिले होते है साहब तब होठ खुद ब खुद सिले होते हैं सादगी की तो अपनी खासियत है साहब बिन बोले हर किसी से मिले होते हैं। हर बार खूबसूरती पे तो शायरी मुमकिन नहीं साहब पर बिन चांद-ए-दीदार के भी शायरी मुमकिन नहीं साहब। मयखानों की लत होगी ओ और होंगे मेरे बाद मुझे तो होश ही न रही हुस्न- ए-दीदार के बाद।