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Showing posts from December, 2021

किसी का टाइम पास मत बना देना।

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बातों का अहसास मत बना देना मुझे किसी का खास मत बना देना बस इतना रहम करना मेरे मालिक  किसी का टाइम पास मत बना देना। जान कह कर जो जान देते थे ओ चले गये अनजान बन कर फितरत किसकी क्या है क्या पता बारी आयी तो चले गये ज्ञान देकर। अब होंसला दे खुदा की निकाल सकूं खुद को भी किसी तरह संभाल सकूं आसां नहीं रूह का जिस्म से जुदा होना बगैर उसके जीने की आदत डाल सकूं। हमने ओ भयावह मंजर भी देखा है किसी को टूटते हुये अंदर से देखा है अब किसी के लिये क्या रोना धोना हमने तो अब खुद में सिकंदर देखा है।  

आसमां के दिलों पर वही राज करते हैं वक्त पर जो वक्त से प्यार करते हैं।

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  आसमां के दिलों पर वही राज करते हैं वक्त  पर  जो  वक्त  से  प्यार  करते हैं। धूमिल  नहीं  होती  है  कभी छवि उनकी जो कर्मो के हुनर से तूफान पैदा करते है।

हुनर जीने का जाए।

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  जीवन की काल परिधि से निकलना  हमें  आ  जाए। हुनर  जीने  का  आ  जाए तो जीना आसान हो जाए। रोती  हुयी  आंखों  को खुशी  देना  आ  जाए मायूस  चेहरे  को   गर हँसाना  मुझे  आ  जाए तो हुनर जीने का जाए।

रास्ता खुद बन जायेगा।

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  तुम  कदम  तो  बढाओ रास्ता खुद बन जायेगा। तुम चलना तो सुरु करो कारवां खुद बन जायेगा। पथ मिलेंगे तुम्हें पथरीले और सर्प भी कुछ ज़हरीले तू सब पर चलकर जाएगा हौंसल रख रास्ता खुद बन जायेगा। जो छूट रहे हैं पीछे उनको  छूट  जाने दे जो रूठ रहे हैं तुझसे उन्हें  रूठ  जाने  दे लगा निशाना चिड़ियाँ की आंख पर मंज़िल चल कर आएगा तुम  कदम  तो  बढाओ रास्ता खुद बन जायेगा। छाएंगे  घने  बादल  भी कड़केंगी बिजलियां भी ये  अंधेरा  तुम्हें डरायेगा उसी में कोई जुगनू तुम्हें छोटी सी रोशनी दे जाएगा तुम   कदम   तो   बढाओ रास्ता  खुद  बन  जायेगा। परिस्थितियां तड़पेंगी और चिल्लाएंगी तेरे  आगे  मजबूरियां बौनी हो जाएंगी तू  सूरज की  तरह निकल कर आएगा तू कदम तो बढ़ा रास्ता खुद बन जाएगा। वक्त है फैसला लेने का ये वक्त बार बार न आएगा चूक गया गर तू आज जिंदगी भर पछतायेगा तू   कदम   तो   बढ़ा रास्ता खुद बन जाएगा।

जलने दो चरागों को बुझाने से फायदा क्या है।

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  सूरज न सही, हिस्से का अंधेरा तो मिटाएगा जलने दो चरागों को बुझाने से फायदा क्या है। महफूज़ है इश्क़ ताजमहल की संगमरमरी बाहों में फिर  रहने  दो, उसे  गिराने  से  फायदा  क्या  है। जब  आंखों  में  समाया  है  ये  बेदाग़ बदन मेरा फिर   रूह  में  उतर  जाने  से  फायदा  क्या  है। उड़ान  भर  ली  है  जिसने, उसे  उड़  जाने दो बार    बार   गिराने    से    फायदा    क्या   है। सज्जनता  अपनी   परवरिश   खुद  करती  है उसे   खोफ   दिखाने    से   फायदा   क्या  है। गिर चुका है ओ लोभ की असीमित गहराई में गिरी  हुयी  चीज़ को उठाने से फायदा क्या है।

आप यूं ही मुस्कुराती रहना।

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  खुशियों      का    भंडार   है नई    रंगत    नई   बहार   है आप  यूं  ही मुस्कुराती रहना हमारी  तरफ से ये उपहार है। जिंदगी  इतनी  मकबूल  हो की   हर  दुआ   कबूल   हो चाहें  तो  आसमां  झुका  ले अपनी सल्तनत का वसूल हो। जिंदगी  को  ऐसी  ग़ज़ल दें गमों को चुटकी  में मसल दें किस्मत   बुलंद   हो   इतनी की हवाओं का रुख बदल दें। ममता का ऐसा आंचल मिले, की आंखों में चमकता काजल मिले हसरतें  इतनी  जवान  हों, की मुटठी में सिमटता बादल मिले।

कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है।

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  दवा   को   दावे    के    साथ   और पानी  का   पाचन  करा  सकता  है कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है। सुबह  चुम्बन के साथ आंखें खोलकर रात को मीठी यादों संग सुला सकता है कोई  इतना  प्यार कैसे कर सकता है। मन  की भूख  को  चेहरे के  प्रताप से तन की , आंखों से सांत करा सकता है। कोई  इतना  प्यार कैसे कर सकता है। जिंदगी की  इस  बेजोड़ ठिठुरन में भी गर्म कम्बल का अहसास करा सकता है कोई  इतना  प्यार  कैसे कर सकता है। पलकों से  आँशुओँ के मोती चुराकर चेहरे पर प्यारी मुस्कान ला सकता है। कोई  इतना प्यार कैसे कर सकता है। मेरी आदतों को अपना गहना बनाकर अपने सांसों के तन को सजा सकता है कोई  इतना प्यार  कैसे कर सकता है।