किसी का टाइम पास मत बना देना।

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बातों का अहसास मत बना देना मुझे किसी का खास मत बना देना बस इतना रहम करना मेरे मालिक  किसी का टाइम पास मत बना देना। जान कह कर जो जान देते थे ओ चले गये अनजान बन कर फितरत किसकी क्या है क्या पता बारी आयी तो चले गये ज्ञान देकर। अब होंसला दे खुदा की निकाल सकूं खुद को भी किसी तरह संभाल सकूं आसां नहीं रूह का जिस्म से जुदा होना बगैर उसके जीने की आदत डाल सकूं। हमने ओ भयावह मंजर भी देखा है किसी को टूटते हुये अंदर से देखा है अब किसी के लिये क्या रोना धोना हमने तो अब खुद में सिकंदर देखा है।  

तेरे बिन जिंदगी बसर कैसे हो।

 

जो  अमृत  है  ओ  ज़हर  कैसे  हो
तेरे  बिन  जिंदगी  बसर  कैसे  हो।

ख़्वाबों के अपने  सलीक़े अलग  हैं
उजालों में  इनका  असर कैसे  हो।

इंसानियत  प्रकृति  की  गोद  में  हो
वहां  कुदरत   का   कहर  कैसे  हो।

घरों की पहचान बाप के नाम  से हो
वह  जगह   कोई   शहर   कैसे  हो।

पीने  के  योग्य  भी  न  रह  गया  हो
वह  जल स्रोत  कोई  नहर  कैसे  हो।

खुदगर्ज़ी की बांध से जो बंध गया हो
उस सागर में फिर कोई लहर कैसे हो।

ढल  गया  हो  दिन  हवस की दौड़ में
फिर उसमें सांझ या दो पहर कैसे हो।

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