लारा भाग 7 : वो नाम… जो राम ने नहीं सुना था|

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  Behind the Scenes Love Story ❤ ️ Part 7: वो नाम … जो राम ने नहीं सुना था (Definitive Final) वो रात दोनों ने अलग - अलग जागकर गुज़ारी थी। न राम को नींद आई … न सोमा को सुकून मिला। और अगले दिन — शाम ढलते ही राम का फोन आया। सोमा ने कुछ पल स्क्रीन को देखा … फिर कॉल उठा ली। " कल की बात अधूरी रह गई थी …" राम की आवाज़ धीमी थी — थोड़ी थकी हुई। सोमा चुप रही। " सोमा … ऐसी क्या मजबूरी है ?" राम ने धीरे से पूछा , " जो तुम मेरे साथ ऐसा कर रही हो ?" सोमा ने   लंबी साँस ली। जैसे वो शब्द नहीं — बल्कि कोई बोझ उठाने जा रही हो। " राम जी … कारण एक नहीं है। बहुत हैं …" " पहला …" उसकी आवाज़ हल्की काँपी , " मैं उन लोगों को धोखा नहीं दे सकती … जिनकी गोद में पली - बढ़ी हूँ। जिनकी उँगली पकड़कर चलना सीखा। " " और आपकी family…" वो रुकी , " उनका भरोसा तो बिल्कुल नहीं तोड़ सकती। " ...

एक घटना जिसने देश को झकझोर का रख दिया था।

ओडिशा के एक अस्पताल की ह्रदयविदारक घटना जिसमें दीनू मांझी नामक आदिवासी की पत्नीक tv के कारण मृत्यू हो जाती है और वह अपनी पत्नी को कंधों पर उठाकर चल देता है और 12 km तक जाता है,इसके बाद ही उसको एम्बुलेंस मुहैया करायी जाती है जो हमारे देश की अव्यवस्था का आईना पेश करती है।जिस घटना ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया।

ओ  लाश  नहीं  आखिरी  आस  थी
लाचार व्यवस्था की जिंदा अहसास थी

मजबूत  कंधे  की  ओ कहानी है
कांपते  मेरे  रूह  की  जवानी  है

हर  सख्स  के लवों की आवाज़ है
सरेआम  मरती इंसानियत आज है

बहुतों  ने  देखा बहुतों ने सोंचा होगा
हर किसी ने व्यवस्था को कोसा होगा

तस्वीर देख कर होंगे हम जिंदा नहीं
इस पर इंसानियत होती शर्मिंदा नहीं

फुट -फुट कर रोया किया कितना गिला होगा
जनाजा लेकर जब  प्रियतम  का  चला होगा।

कितनी भयावह दुःखद रही ओ घड़ी होगी
जब शौहर के कंधे पर चली पगडंडी होगी।

यह तस्वीर क्या  बताने के  लिए काफी नहीं
कि हम ज़मीर बेंचने में करते न इंसाफी नहीं

आदि  से  अनन्त  तक  का  वासी है
सच  में  दीनू  एक  आदिवासी  है।

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