लारा भाग 7 : वो नाम… जो राम ने नहीं सुना था|

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  Behind the Scenes Love Story ❤ ️ Part 7: वो नाम … जो राम ने नहीं सुना था (Definitive Final) वो रात दोनों ने अलग - अलग जागकर गुज़ारी थी। न राम को नींद आई … न सोमा को सुकून मिला। और अगले दिन — शाम ढलते ही राम का फोन आया। सोमा ने कुछ पल स्क्रीन को देखा … फिर कॉल उठा ली। " कल की बात अधूरी रह गई थी …" राम की आवाज़ धीमी थी — थोड़ी थकी हुई। सोमा चुप रही। " सोमा … ऐसी क्या मजबूरी है ?" राम ने धीरे से पूछा , " जो तुम मेरे साथ ऐसा कर रही हो ?" सोमा ने   लंबी साँस ली। जैसे वो शब्द नहीं — बल्कि कोई बोझ उठाने जा रही हो। " राम जी … कारण एक नहीं है। बहुत हैं …" " पहला …" उसकी आवाज़ हल्की काँपी , " मैं उन लोगों को धोखा नहीं दे सकती … जिनकी गोद में पली - बढ़ी हूँ। जिनकी उँगली पकड़कर चलना सीखा। " " और आपकी family…" वो रुकी , " उनका भरोसा तो बिल्कुल नहीं तोड़ सकती। " ...

फ़ना उसी दिन मुझे मेरे खुदा कर देना।


 

उसके ख्वाबों से एक दिन जुदा कर देना
फ़ना उसी दिन मुझे मेरे खुदा कर देना।

ख़्याल रहे कि उसकी परछाईं भी न पड़े
दरिया  खुद  को   इतना  जुदा  कर देना।

झोपड़ी  महलों  से  भी  सुंदर  लगने  लगे
मोहब्बत  कुछ  ऐसी  ही  अता  कर  देना।

तुम्हें  चाहे  न  चाहे  दरिया  उसकी  मरज़ी
मग़र दिल अपना उसी पर फ़िदा कर देना।

महसूस हो कि प्रेमिका भी साथ नहीं देगी
फिर ख़ुद को भी तुम शादी शुदा कर देना।

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