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डिजिटल लव (Digital Love)
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न चेक करो इतनी डीपी मेरी वर्ना प्रोफाइल लॉक कर देंगे। गर करते रहे यूं ही मैसेज तुम तो तुम्हें भी हम ब्लॉक कर देंगे। मालूम है कि आप शादी शुदा हो आते समय दरवाज़ा नॉक कर देंगे। मोहब्बत तो आप सूरत से किये हो सीरत से हम आपको शॉक कर देंगे। पता तो चल गया है पता तुम्हारा तेरी गलियों में हम वॉक कर लेंगे। मिल गयी तुम तो मेरी किस्मत है वरना वहीं हम डांस फॉक कर लेंगे।
आ बैठ जिंदगी ।
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आ बैठ जिंदगी तुझसे बंटवारा कर लेते हैं आधी काट दी, आधी से किनारा कर लेते हैं। मुक़म्मल एक भी ख्वाब न होने दिया तूने अब खुद को हम बेसहारा कर लेते हैं। जितना भी गम उठाया है जिंदगी मेरे लिये आ सब का हिंसाब हम दुबारा कर लेते हैं। मौत से भी भयावह किरदार तेरा है जिंदगी छोड़ तक़रार अब मेरा को हमारा कर लेते हैं।
जो जख्म तूने दिया ।
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और किस क़दर मैं तेरा साथ दूं कहो, कैसे मैं जिंदगी काट दूं। ये हालत मेरी उसी ने बनायी है अब इल्ज़ाम मैं किसके माथ दूं। जो जख्म तूने दिया है सनम अब उसे मैं कहां कहां बांट दूं। मेरी खामोशियों का शोर हो तुम उन यादों को मैं कहां पाट दूं। न देखा था खुशबू-ए-ज़हर हमने तेरे दीदार को कौन सा नाम दूं। जब ठहराओ नही तुझमे दरिया बहने के सिवा कौन सा काम दूं। छुड़ा कर हाथ जब तुम चली गयी अब किसे मैं मोहब्बत का हाथ दूं। रख लो मेरे हिस्से की खुशियां सारी प्रेम से ज्यादा गम का कौन सा पाथ दूं।
मशविरा मत देना।
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इश्क कोई दूसरा मत देना जीने का मशविरा मत देना। छीन कर मेरी खुशियां सारी खुश रहने का मशविरा मत देना। वक्त था साथ चलने का नजरंदाज कर दिया आपने गम-ए- हालात देखकर मुझे साथ चलने का मशविरा मत देना। हो सके तो छीन लो सांसें हमारी झूठे वादों का जकीरा मत देना। मानता हूं कि मुश्किल है डगर पनघट की मुझे रास्ते बदलने का मशविरा मत देना। गर गुम हो जाऊं तेरी बाहों में ए हुस्न मुझे उठने का फिर मशविरा मत देना।
मेरे गांव को तूने शहर कर दिया।
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रिश्तों में कैसा जहर भर दिया मेरे गांव को तूने शहर कर दिया चाँद - ए - दीदार को मैं आतुर था वक्त ने फिर से दोपहर कर दिया। पसीने छूट रहे हैं बदल के भी जुल्फों ने ऐसा कहर कर दिया। आँवांरगी का मज़ा ही अलग है ख़्वावों ने रेत का शहर कर दिया। सरफिरे शायरों का रहमों करम है जो गुलाबी ओंठ को नहर कर दिया। रोंक क्या सकेंगी ज़माने की बंदिशें भले पहरा सातों पहर कर दिया।
दूसरा आखिरी पन्ना।(Second Last Page)
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अब बात नहीं होती, न ही fb पर रात - रात भर चैट होती है। काफी दिन गुजर जाता है, न ही कोई मैसेज न ही कोई call। सब बन्द पड़ा है अगर एक तरफ से hello आ भी जाता है तो दूसरी तरफ से रिप्लाई नहीं आएगा। ऐसा नहीं कि दोंनो तरफ से प्यार दफन हो गया है लेकिन हाँ दफनाने का प्रयास भरपूर किया गया है। अगर वक्त और हालात ने साथ दिया तो ओ पूर्णतया दफन भी हो जयेगा। चलो ये भी अच्छा है। लेटे - लेटे आशु सोंच रहा था कि देखो कैसे सारी रात गुजर जाती थी बातों - बातों में और पता भी नही चलता और वही रात लगता है की कितनी भारी हो गयी। जब प्यार में थे तो कैसे - कैसे रहते थे । मज़ाल था कि बिना प्रेस किये कपड़ा पहन कर office चले जायें, बिना पॉलिश के किये सूज़ पैर में डाल लें, वही दर्पण बार - बार देखा जाता था। वही फ़ोन जो हाथों से एक पल के लिये भी दूर नहीं होता था। उसके साथ - साथ जिंदगी के सारे तौर - तरीके बदल गये। कैसे लाइफ में इश्क के साथ परिवर्तन होता है। तब और अब में कितना फ़र्क हो गया है । अब तो जैसे भी मिल गया पहन लिया, जो भी मिल गया खा लिया, क्या पसंद क्या न पसंद, क्या प्रेस क्या न प्रेस कौन देखने वाला है ...
उदास सिलवटों की तुम्हीं सयन थी मेरी।
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तुम्हीं आह थी मेरी तुम्ही चाह थी मेरी मुस्कुराने की बस तुम्हीं राह थी मेरी। तुम्हीं रण थी मेरी तुम्हीं प्रण थी मेरी चुम्बन की आखिरी तुम्हीं छण थी मेरी। तुम्हीं हया थी मेरी तुम्हीं दया थी मेरी मेरे अल्फ़ाज़ों से तुम्हीं बयां थी मेरी। तुम्हीं नयन थी मेरी तुम्हीं चयन थी मेरी उदास सिलवटों की तुम्हीं सयन थी मेरी। तुम्हीं अगन थी मेरी तुम्हीं लगन थी मेरी चूमते मेरे माथे की तुम्हीं सजन थी मेरी। तुम्हीं जीत थी मेरी तुम्हीं हार थी मेरी बहते आँशुओं की तुम्हीं धार थी मेरी। तुम्हीं आज थी मेरी तुम्हीं साज़ थी मेरी छुपाता फिरूं जिसे तुम्हीं राज़ थी मेरी। तुम्हीं सवाल थी मेरी तुम्हीं हवाल थी मेरी होते अन्तर्द्वन्द की तुम्हीं बवाल थी मेरी। तुम्हीं गीता थी मेरी तुम्हीं कुरान थी मेरी बातें शास्त्र की करें तुम्हीं पुरान थी मेरी। "दरिया"
रिस्ते प्रेम के ही हैं जो कभी पुराने नहीं लगते।
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बिन साथ सफर जिंदगी के सुहाने नहीं लगते रिस्ते प्रेम के ही हैं जो कभी पुराने नहीं लगते। चाह कितनी भी हो इस जमाने की दरिया दीपक घरों के कभी बेटे जलाने नहीं लगते। आंधियों ने गर पैगाम भेजा है तो सुन लो किसी ख़ौफ़ से हम दीपक बुझाने नहीं लगते। मिला हूँ तुझसे तो सिर्फ तुम्हारी आत्मा से इतने में परमात्मा विधान मिटाने नहीं लगते। गर इश्क था तो बेड़ियां राह बनाकर चली आना हम यूं ही ख्वाबों में जान लुटाने नहीं लगते। मानता हूँ कि कुछ कसर रह गयी मेरी तरफ से मगर जाने के ये सटीक बहाने नहीं लगते। जब जहां जैसे चाहा छोड़ दिया दरिया हमें भुलाने में किसी को जमाने नहीं लगते। " दरिया"
दुखी नहीं मैं बहुत उदास हूँ।।
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दुखी नहीं मैं बहुत उदास हूँ दर्द का मीठा अहसास हूँ। तेरी चाहत में सब कुछ भूल गये मंजिल-ए-सफर में झूल गये तेरी चाहतों ने मुह मोड़ लिया उन तड़पती यादों के पास हूँ। प्यार नहीं मैं तो बस प्यास हूँ दुखी नहीं मैं बहुत उदास हूँ।। आंधियों में जले, ओ मसाल था आदर्शों की ऐसी मिशाल था वक्त से बहुत परास्त हूँ जुनूं नहीं मैं तो इक आश हूँ दुखी नहीं मैं बहुत उदास हूँ।। "दरिया"
गर आंखें इतनी सैतानी न हों।।
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गर आंखें इतनी सैतानी न हों तो मोहब्बत में इतनी परेशानी न हो। पिछली अदा से ही सहमा हुआ हूँ मैं अब और अदा कोई तूफानी न हो। मद मस्त पवन की मीठी फुहार अब बारिश भी कोई मस्तानी न हो। दौर-ए- जहां में किस किस से प्यार हुआ अब और कोई प्रेम कहानी न हो। या मौला मुकम्मल जिंदगी ऐसी कर इस पर और किसी की मेहरबानी न हो। कोई टूट न जाये, कोई रूठ न जाये अब रिश्तों में ऐसी हैवानी न हो। "दरिया"
हजार कोशिशें ज़माने की नाकाम हो जायेगी
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हजार कोशिशें ज़माने की नाकाम हो जायेगी जिस दिन मोहब्बत मेरी बेनकाब हो जायेगी। खुद को नहीं रोक पायेगी जब दर्द मोहब्बत बन जायेगी। दिल में तड़प इतनी होगी इधर की आग उस तरफ भी लग जायेगी। या तो खुद दौड़ी चली आयेगी या आँशुओं के समंदर में डूब जायेगी। ये जमाना यूं ही हाथ मसलता रह जायेगा जिस दिन मौत मेरी मोहब्बत बन जायेगी। "दरिया"