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लाजबाब हो तुम।
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मेरे इश्क की आखिरी किताब हो तुम लाजवाब से भी ज्यादा लाजवाब हो तुम। मालूम, तारीफ़ सुनने को बेताब हो तुम मेरी शायरी के हर शब्द का ख्वाब हो तुम। झकझोर देगी तुम्हे ये खामोसी भी मेरी मेरे बेचैन सवालों का भी जवाब हो तुम। उतार लूँ चांद को जमीं पे गर कहो तुम मेरे दिल पर हुकूमत-ए- नवाब हो तुम। लौट भी आओ कि दिल बहुत उदास है 'दरिया' की रोजी रोटी का हिंसाब हो तुम। "दरिया"
मुझे इश्क हो गया।
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तेरे लंबे - लंबे बालों से और सुर्ख गुलाबी गालों से मुझे इश्क हो गया। होंठों की कचनारों से और हिरनी सी चालों से मुझे इश्क हो गया। तेरे जुल्फों की घटाओं से और नयनों की मटकाओं से मुझे इश्क हो गया। तेरे व्यभिचारिणी हालातों से और संग में पीते - खातों से मुझे इश्क हो गया। ग्रीन टी के प्यालों से नाभी और कपालों से मुझे इश्क हो गया। तेरे संग चांदनी रातों से और मीठी - मीठी बातों से मुझे इश्क हो गया। तेरे बदलते अंदाज़ों से नये - नये आगज़ों से मुझे इश्क हो गया। तेरे टूटते होंसलों से बढ़ते गलत फैंसलों से मुझे इश्क हो गया। "दरिया"
पर्यवारण हमारा है।
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हवा का सहारा है नदिया का किनारा है सच पूछो तो ये पर्यावरण हमारा है। पहाड़ों को तोड़ कर धाराओं को मोड़ कर जो हुनर हमने दिखया है परिणाम है उसी का आज, बच्चा - बच्चा बेसहारा है। ज़हर घोला है हमने नाला नदियों में खोला है हमने विज्ञान पढ़ पढ़ कर रसायनों का अविष्कार किया हमने परिणाम उसी का है हर इंशान आज बेचारा है। काश दादा की बात माने होते एक पौधा अपने हिस्से में लगाये होते कोने कोने में आज हरियाली होती समृद्धिवान ये पर्यावरण हमारा होता।
पर्दा हटा रखना।
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पलकें भिगो कर सींचा है हमने हो सके वतन को हरा भरा रखना। वर्षा नहीं सकते हो दो फूल मुझ पर पत्थर फेंकने से खुद को बचा रखना। बीच की दूरियों को इतना सज़ा रखना हो सके हथेलियों को सफा-सफा रखना शौक नहीं लाठियां भांजने का मुझे हो सके पलकों से पर्दा हटा रखना। न दे सको दान एक फूटी कौड़ी भी राष्ट्र हित में तिज़ोरी खुला रखना। 'दरिया'
बस अकेला रहा।
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तन्हाइयों का लगा ऐसा मेला रहा मैं जहां भी गया बस अकेला रहा। शक थी तो बस अपनी काबिलियत पर मैं ईमानदार गुरु का भ्रस्ट चेला रहा। लोगों ने चाहा भी तो कुछ इस कदर व्यहार अपनों का भी सौतेला रहा। ख़ौफ़ खंजरों से कभी खाया नहीं हमने रूप प्यार का ही जहरीला सपेला रहा। सेहत सुधरे भी तो कैसे सनम का फलों में खाता ही सिर्फ़ केला रहा। गर चाहती खुशियां पास आने को कभी खुदा मारता गमों का बस ढेला रहा।
आस्तीन सांप की।
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उनको हो जाने दो राख की जो परवाह न करे आपकी। यकीं मानो , मिट गया है ओ जिसने सुनी न माँ बाप की। बात मानों तुम पाल लो नाग को पर न पालो आस्तीन सांप की। कर लो कुछ सद्कर्म भी प्यारे वर्ना असर न करेगी हरि जाप की बस चाह लो एक बार जो सनम मिट जाएंगी दूरियां दिलों के नाप की। मिल जाये जिंदगी उसे भी बच्चा गोद ले लो किसी अनाथ की। 'दरिया'
अदभुत नज़ारा।
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मैं तो बस यूं ही बालकनी में खड़ा था लेकिन अचानक से मेरी नजर जब उस तरफ गई तो मैं चौंकन्ना स रह गया ओ अदभुत नजारा जो मैं शायद पहली बार देख रहा था ओ भी इतना करीब से ।ओ मूड बना रहा था या बना रही थी यह तो मैं ठीक से कन्फर्म नहीं हूँ लेकिन एक एक स्टेप जो एक एक करके खोल रहा था और उससे बनने वाली ओ छबि क्या कहना जिसे भगवान ने इतना सारा कुछ दिया हो उसको फिर किस चीज़ की कमी हो सकती है भला।अपनी मस्ती में झूम झूम कर प्रकृत के भविष्य का वर्णन जिस तरह कर रहा था कोई कवि या लेखक क्या खाक ऐसा कर सकता है और जो एक बार घूम जाता तो पूरा मौसम झूम उठता ये कोई कहने वाली बात नही है इसका जीता - जागता उदाहरण है कि शाम को means अभी खूबसूरत रिम - झिम बारिस धरा के बदन को भिगो रही थी। मौसम का यह पूर्वानुमान शायद इससे बेहतर कोई लगा सकता हो अगर हम गूगल और विज्ञान की बात न करें तो। एक मोर जो जुल्फ रूपी अपने पंख को जिस मस्ती में लहराता और नाच रहा था देख के मेरा ही नहीं बल्कि वहाँ मौजूद सभी लोग मूरीद हो गए। टक - टकी लगा के सब बस उसे ही देख रहे थे जो खुले दिल से मौसम को न्योता दे रहा था। यह वही मोर है साहब जिसे भारत सरक...
Happy होली।
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दिलों में रंगत नई है आई खुशियों की सौगात ले आई आओ मिलकर मनाते है सब त्योहार रंगों की जो आई होली की हार्दिक बधाई। न मिलने का कोई मलाल रहे बस चेहरा खुशी से लाल रहे हम मस्ती में खूब झूमते रहें चारों तरफ बस गुलाल रहे। न दिलों में अब बवाल रहे न आंखें किसी पर लाल रहें इस तरह घुल मिल कर रहें हम जैसे रंगों में मिलकर गुलाल रहे। 'दरिया'
मुझे तो होश ही न रही।
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जब पलकों के शिल शिले होते है साहब तब होठ खुद ब खुद सिले होते हैं सादगी की तो अपनी खासियत है साहब बिन बोले हर किसी से मिले होते हैं। हर बार खूबसूरती पे तो शायरी मुमकिन नहीं साहब पर बिन चांद-ए-दीदार के भी शायरी मुमकिन नहीं साहब। मयखानों की लत होगी ओ और होंगे मेरे बाद मुझे तो होश ही न रही हुस्न- ए-दीदार के बाद।
Happy Promise Day.जान दे देंगे पर जाने नहीं देंगे।
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झूठे वादे हम सजाने नहीं देंगे जान दे देंगे पर जाने नहीं देंगे। इश्क के ऐसे फ़साने नहीं देंगे आँखों को आंशू गिराने नहीं देंगे। नई मुस्कान तुझे न दे सके तो क्या पुरानी मुस्कुराहट को हटाने नहीं देंगे। रस्म है यहां रुक्सत में रोना 'दरिया' भरी आंखों से तुझे जाने नहीं देंगे। मांगा था इक रोज़ खुदा से तुझे बोले 'दरिया' ऐसे हम तुझे किनारे नहीं देंगे। याद भले न करे तू मुझे कभी भी खुद को तुझे हम भुलाने नहीं देंगे। कितनी भी सिद्दत से चाह ले कोई हमें तेरी यादों के सिवा किसी को आने नहीं देंगे।
इतनी अहमियत देने के लिये thanks। Happy Teddy Day.
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Happy Teddy Day Hello कौन, अच्छा तो अब कौन मतलब की पहचान भी नहीं पाये, ऐसे ही धीरे धीरे आप मुझे भी भूल जाएंगे।अरे नहीं यार ,क्या है न कि मैंने हेड फ़ोन लगा रखा है और फोन जेब मे रखा है इसलिए पता नही चल पाया,और बताओ कैसी हो तुम सफाई देते हुये आशु ने पूछा।आशी ठीक हूँ आप बताओ कैसे हो, मैं भी मस्त हूँ। क्या बात है आजकल कॉलेज नहीं आ रहे हो, पढ़ के पास हो गए क्या ,आशी ने मजाकिया लहज़े में पूंछा। नहीं यार, मैं तो माता रानी के दरबार आया हूँ, बताया तो था आपसे।अरे हाँ यार मैं तो भूल ही गयी थी और बताओ पहुंच गए ठीक ठाक। हाँ पहुंच भी गया हूँ और दर्शन भी कर लिया है अब निकलने की फिराक में हुँ। अच्छा तो मेरे लिए क्या ला रहे हो आशी ने बड़ी उत्सुकता से पूंछा। आशु- जो आप कहें, अरे नहीं मैं क्या कहूँ जो आपके समझ मे आये ले आना ये कहते हुये आशी ने फोन काट दिया। आशु के लिये यह काफी मुश्किल का काम है क्योंकि यदि बता दिया होता तो आसान रहता। आशु सोंचने लगे कि अब क्या करें जुड़ा ले लूं बाल में लगाने वाला या फिर सुरमा ले लूं आंख में लगाने वाला अंततः परिणाम यह लिकला कि एक लॉकेट ले लें जिसे आसानी से पहन सकेंगी। अग...
Happy Propose Day
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Happy propose day क्या बात है आज तो एकदम कहर ढा रही हो, नहीं ऐसा तो कुछ भी नही है अपनी उंगलियों को जुल्फों में पिरोते हुये बोली।अरे यार मैं तो जल्दी जल्दी में कुछ कर नहीं पायी बस ऐसे ही कपड़ा डाला और चल दिया। हां जो भी हो लेकिन बहुत खूबसूरत लग रही हो अरे जाने भी दो आपको तो ऐसा ही लगता है पलकें गिरा के आशी शर्माते हुये बोली। वाकई में आज ओ बहुत खूबसूरत लग रही थी क्योंकि यह स्टूडेंट लाइफ का सबसे कड़वा अनुभव है कि जिसे आप रोज यूनिफार्म में सामान्यतः देखते हैं और अचानक से ओ फॉर्मल ड्रेस में आ जाये तो देख कर दंग रह जाना लाज़मी है। यह आशु के साथ पहली बार हो रहा था। मन्दिर की सीढ़ियां चढ़ते वक्त आशु दुपट्टे को पकड़ने ही जा रहे थे ( जो सूट सलवार पर आज डाल कर आयी थी) कि तभी आशी ने आशु के हाथो को मजबूती से पकड़ कर मन्दिर की फेरियां करने लगी थी। पुजारी- बेटा तुम तो हमेशा अकेले आती थी आज ये तुम्हारे साथ लड़का कौन है।आशी- पुजारी जी ये मेरे कॉलेज के दोस्त हैं आशी ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया और फेरे लगाते रहे। फेरे पूरे करने बाद आशी ने चंदन लिया और आशु के ललाट पर हलका से लगाया ओर फिर पुजारी जी ने दोनों ...
Happy Rose Day
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Happy Rose Day बसंत ही तो लगा था जब हम मिले थे गोण्डा के उस पावन स्थल पर जिसे हम नूरामल मंदिर के नाम से जानते हैं, ऐसे ही हवाएं गुन गुनाती थी चिड़ियाँ कलरव करके मन को मोह रही थी। हो भी क्यों न पहली बार किसी ने उंगलियों को इस कदर स्पर्श किया था, छूने और पकड़ने को तो हजारों ने पकड़ा होगा लेकिन उसके स्पर्श का अहसास किसी और में न हुआ था। यह सच है कि यदि हम कुछ गलत करने लगते हैं तो हमारे हाथ पावँ फूलने लगते हैं पर इसको भी नकारा नहीं जा सकता है कि अच्छे काम की सुरुवात में भी हालात कुछ ऐसे ही होते हैं। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 उसने फोन करके अचानक बताया था कि मात्र 10 मिनट का समय है तुम्हारे पास क्योंकि मैं घर से निकल चुकी हूँ मन्दिर के लिए और मैं कैम्पस में बिना साधन के घूम रहा था। था तो मेरे लिए चुनौती का ही विषय पर मेरा परम् मित्र मुझे दिख गया था और मैने अपने वज़न को ताक पर रख कर उससे गाड़ी मांग ली थी। दोस्त था लेकिन कमीना वाला अच्छा दोस्त था जो बिना किसी सवाल जबाब के गाड़ी दे दी थी। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 मैं जैसे तैसे तो वहां पहुंच गया था लेकिन अंदर का दृस्य था जो मैं बस द...