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इस  क़दर  भी  न   सताया  करो।

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  पास  आकर  न  दूर  जाया  करो इस  क़दर  भी  न   सताया  करो। ख़्वाबों   के    दरमियां   फासले  हैं न  ख्वाबों  से  तुम  घबराया  करो। जिंदगी की  असली  कमाई  तुम हो मेरी  कमाई  से न मुकर जाया करो। दिल  दे  दिये  हो तो भरोसा रख्खो हर  जगह  न  हाथ आजमाया करो। गम-ए-जिंदगी  जीना तो आसां नहीं मग़र थोड़ी थोड़ी तो सुलझाया करो सभी को आईने दिखाना जरूरी नहीं गिरेबां में अपने भी झांक जाया करो। गर हो गया हूँ रुस्वा तो थोड़ा ध्यान दो कभी कभार तो हमें भी मनाया करो। बेसक नहायी हो तुम नीली झील में वक्त रहते केशुओं को सुखाया करो। सवांरती फिरती हो जिन ज़ुल्फों को उन जुल्फों में न हमें उलझाया करो। ये  इबादत के दिन  हैं तो सुनो दरिया खुदा  की रहमतों में मुस्कुराया करो। अपनी आदतों से क्यूं बाज नहीं आती मु आंख तुम इतना न मटकाया करो।

जहां कल था वहीं आज हूँ।

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 जहां कल था वहीं आज हूँ मैं  ही  रस्म-ओ-रिवाज़  हूँ।  लड़की  की  आबरू हूँ  मैं और मनचलों पर गाज  हूँ।  बुर्का  और   घूंघट  भी  हूँ मैं  ही  जलता  समाज  हूँ।  मैं  मोहब्बत  और ताज हूं मोहब्बत  को मोहताज़ हूँ।   फसल   और   किसान  हूँ मैं  ही  गांव  का अनाज हूँ। संस्कारों    का   गिद्ध    हूँ जिम्मेदारियों  का  बाज हूँ। बसपा   का   प्रशासन   हूँ मैं  सपा  का  गुंडा  राज हूँ। कर्मों   का    योगी   हूँ   मैं अयोध्या  का  राम राज हूँ। सपनों    का     सूरज    हूँ मैं  ही   डूबता   जहाज़  हूँ। खामोशी   का   समंदर   हूँ मैं   वक्ता   चाल   बा...

नाज़ुक दिल है ज्यादा मत दुखाना।

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  भूले   से   भी   जान  भूल  मत  जाना नाज़ुक  दिल  है  ज्यादा  मत  दुखाना। आ  गया  हूँ  मैं धनवानों की कतार में जान  तू  ही  है  मेरा  असली खजाना। प्यार  तुमसे  है,  बस  यही  था  कहना आता  नहीं  मुझे  ज्यादा  बातें  बनाना। चाह  है  मिलने  की  हम  मिलेंगे जरूर रोक सकेगा  कब  तक  बेरहम जमाना। ख्वाबों का कोई शहर  होता नहीं दरिया बस  प्यार  से  प्यार  का  ध्यान लगाना। आ जाये आँशुओँ  का सैलाब जो कभी इक बार सनम की आंखों में डूब जाना। अनजान था इश्क़ की गुमनाम गलियों से आता  नहीं  मुझे खुद का वज़ूद मिटाना। बिरह  का  दिन  ऐसा भी होता है दरिया भूल  गयी  ओ  हाथों  में  मेंहदी लगाना। जीने  का अंदाज बदल दिया  कोरोना ने सीख  लिया  हमने  नयनों से मुस्कुराना। महसूस  कर...

जिसने ख़ुद को मिटा दिया मेरे खातिर।

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  मैं लड़ता ही कब तलक उससे आख़िर जिसने ख़ुद को मिटा दिया मेरे खातिर। उसकी तो मजबूरियां  थी बिछड़ने की इल्ज़ाम  बेवफ़ा  का लिया मेरे खातिर। बेशक   था  मैं   मोहब्बत   का  दरिया तरस गया हूँ  इक बूंद प्यार के खातिर। जिस्म-फ़रोसी से निकाल कर लायी है उससे ज्यादा उसका दिमाग था शातिर। चलो  अब  इक   राह   नयी   बनाते  हैं कुछ और नहीं ,अपने प्यार  के ख़ातिर। दुनिया  का  एक  सच ये  भी  है 'दरिया' भेंट   होती   रहती   है  पेट  के  ख़ातिर। सेहत  गिरती   रही  मेरी  दिन  -  ब - दिन पीछे  भागता  रहा   मैं  स्वाद  के ख़ातिर। हर   कोई   तुम्हारा    हम   दर्द  है   दरिया तरसोगे  नहीं   चुटकी  भर  नमक ख़ातिर। उलझ  जाते  हैं  सारे  रिस्ते  सही...

मेरी   सुबह   की  सलाम   ले  जाना।

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  मेरी   रातों   की   नींद   उड़ाने   वाले मे री   सुबह   की  सलाम   ले  जाना। खामोशियों   के  अनछुये   रिश्तों   से इश्क़  का  तकिया  कलाम  ले  जाना। जा रही  हो  तो  सुनो  इक बार सनम साथ,अपने दिल का निज़ाम ले जाना। तेरे  इशारों पे  नाचता  फिरता था जो साथ अपने जोरू का गुलाम ले जाना।

नाम उसका फरिश्तों में आ जाये।

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ओ शरारतें, शैतानियां और लड़कपन जी करता हम पुराने रिस्तों में आ जायें। ताकना, झांकना, एक दूजे को डांटना भले खुशियां हमारी किस्तों में आ जायें। कोई शख़्स ऐसा जो मिला दे फिर से हमे यकीनन नाम उसका फरिश्तों में आ जाये। चुन लें कुछ फूल हम भी पुराने लम्हों से फिर तो नाम हमारा मौला-मस्तों में आ जाये। मिल जाऊँ उसे आज भी आसानी से गर नाम मेरा बड़े सस्तों में आ  जाये।

हमें भी पिला दो।

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कोई  राह  हमें  भी  दिखा दो चलना  तो  हमें  भी सिखा दो। भटक रही है दर-बदर जिंदगी किसी ठिकाने हमें भी लगा दो। कब तक रहेंगे मजधार में ख़ुदा किसी किनारे हमें भी लगा दो। सोया सोया स है ये जुनून मेरा अब तो नींद से हमें भी जगा दो। बन्द क़िस्मत का ताला जो खोल दे ऐसे जादूगर से हमें भी मिला दो। जिस प्याले को पीकर अमर हुये दो बूंद उसका हमें भी पिला दो। लगाये रखा जिसने सीने से हमें मिटा उसके सारे शिकवे गिला दो तेरे आशियाने में रोशनी कम हो मेरे दिल का हर कोना जला दो। यूं तो मिले होंगे तुझे लाखों सनम इक बार खुद से हमें भी मिला दो।

जब से 'जान' तेरा जाना हुआ।

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जिस्म-ए-जान बेगाना हुआ। जब से 'जान' तेरा जाना हुआ चीख पड़े तकिया बिस्तर भी जब से 'जान' तेरा जाना हुआ छुप - छुप के रोती है छोटी भी बड़ी का गायब मुस्कुराना हुआ आंगन में मां सिसकती रही बाप का गायब तराना हुआ। चेहरा भाई की भी हवाई हुआ अश्क-ए-पलक जमाना हुआ। कली गली की भी सूख गयी उजड़ा चमन स घराना हुआ।

जीवन का हर हिस्सा बंजर रहा।

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  मुसीबतों के साये में लंगर रहा जीवन का हर हिस्सा बंजर रहा। कोई कितना यकीं कर ले दरिया तू घोंपता पीठ पीछे खंजर रहा। मंजिल -ए-इश्क़ तो जिस्म ही है हवस का भूख और हंगर रहा। डटा रहा मैं रिश्तों के कुरुछेत्र में पाया टूटा मेरा अस्थि पंजर रहा। कोशिश तो बहुत की तुझे पाने की किस्मत का पहिया सदा पंचर रहा।

उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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  जो  हालात  से  लड़े और खड़े रहे जो  गिर  गये  धरा पे और पड़े रहे। उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं। जो  प्रयास  किये  और  बढ़ते  रहे नित  नये   कीर्तमान   गढ़ते   रहे। उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं। जो  उम्मीदों  के  साये में जीते रहे और  घूंट   ज़हर   का   पीते  रहे। उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं। जो  जी  भर  के  अनुभव  लिये धन  , संपदा  और  वैभव  लिये उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं। जो  हाथ  पे   हाथ  धरे   रह   गये और  आँख  में  आँशु  भरे  रह गये उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं। जो  लाज  के  काज  से  परे   रहे और  कर्म  के  साज  से  सजे  रहे उन्हें भी नव वर्ष की शुभकामनाएं। जो  सूरज  की  आग  में जलते रहे और चंद्रमा की शीत...

आसमां के दिलों पर वही राज करते हैं वक्त पर जो वक्त से प्यार करते हैं।

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  आसमां के दिलों पर वही राज करते हैं वक्त  पर  जो  वक्त  से  प्यार  करते हैं। धूमिल  नहीं  होती  है  कभी छवि उनकी जो कर्मो के हुनर से तूफान पैदा करते है।

हुनर जीने का जाए।

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  जीवन की काल परिधि से निकलना  हमें  आ  जाए। हुनर  जीने  का  आ  जाए तो जीना आसान हो जाए। रोती  हुयी  आंखों  को खुशी  देना  आ  जाए मायूस  चेहरे  को   गर हँसाना  मुझे  आ  जाए तो हुनर जीने का जाए।

रास्ता खुद बन जायेगा।

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  तुम  कदम  तो  बढाओ रास्ता खुद बन जायेगा। तुम चलना तो सुरु करो कारवां खुद बन जायेगा। पथ मिलेंगे तुम्हें पथरीले और सर्प भी कुछ ज़हरीले तू सब पर चलकर जाएगा हौंसल रख रास्ता खुद बन जायेगा। जो छूट रहे हैं पीछे उनको  छूट  जाने दे जो रूठ रहे हैं तुझसे उन्हें  रूठ  जाने  दे लगा निशाना चिड़ियाँ की आंख पर मंज़िल चल कर आएगा तुम  कदम  तो  बढाओ रास्ता खुद बन जायेगा। छाएंगे  घने  बादल  भी कड़केंगी बिजलियां भी ये  अंधेरा  तुम्हें डरायेगा उसी में कोई जुगनू तुम्हें छोटी सी रोशनी दे जाएगा तुम   कदम   तो   बढाओ रास्ता  खुद  बन  जायेगा। परिस्थितियां तड़पेंगी और चिल्लाएंगी तेरे  आगे  मजबूरियां बौनी हो जाएंगी तू  सूरज की  तरह निकल कर आएगा तू कदम तो बढ़ा रास्ता खुद बन जाएगा। वक्त है फैसला लेने का ये वक्त बार बार न आएगा चूक गया गर तू आज जिंदगी भर पछतायेगा तू   कदम   तो   बढ़ा रास्ता खुद बन जाएगा।

जलने दो चरागों को बुझाने से फायदा क्या है।

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  सूरज न सही, हिस्से का अंधेरा तो मिटाएगा जलने दो चरागों को बुझाने से फायदा क्या है। महफूज़ है इश्क़ ताजमहल की संगमरमरी बाहों में फिर  रहने  दो, उसे  गिराने  से  फायदा  क्या  है। जब  आंखों  में  समाया  है  ये  बेदाग़ बदन मेरा फिर   रूह  में  उतर  जाने  से  फायदा  क्या  है। उड़ान  भर  ली  है  जिसने, उसे  उड़  जाने दो बार    बार   गिराने    से    फायदा    क्या   है। सज्जनता  अपनी   परवरिश   खुद  करती  है उसे   खोफ   दिखाने    से   फायदा   क्या  है। गिर चुका है ओ लोभ की असीमित गहराई में गिरी  हुयी  चीज़ को उठाने से फायदा क्या है।

आप यूं ही मुस्कुराती रहना।

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  खुशियों      का    भंडार   है नई    रंगत    नई   बहार   है आप  यूं  ही मुस्कुराती रहना हमारी  तरफ से ये उपहार है। जिंदगी  इतनी  मकबूल  हो की   हर  दुआ   कबूल   हो चाहें  तो  आसमां  झुका  ले अपनी सल्तनत का वसूल हो। जिंदगी  को  ऐसी  ग़ज़ल दें गमों को चुटकी  में मसल दें किस्मत   बुलंद   हो   इतनी की हवाओं का रुख बदल दें। ममता का ऐसा आंचल मिले, की आंखों में चमकता काजल मिले हसरतें  इतनी  जवान  हों, की मुटठी में सिमटता बादल मिले।

कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है।

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  दवा   को   दावे    के    साथ   और पानी  का   पाचन  करा  सकता  है कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है। सुबह  चुम्बन के साथ आंखें खोलकर रात को मीठी यादों संग सुला सकता है कोई  इतना  प्यार कैसे कर सकता है। मन  की भूख  को  चेहरे के  प्रताप से तन की , आंखों से सांत करा सकता है। कोई  इतना  प्यार कैसे कर सकता है। जिंदगी की  इस  बेजोड़ ठिठुरन में भी गर्म कम्बल का अहसास करा सकता है कोई  इतना  प्यार  कैसे कर सकता है। पलकों से  आँशुओँ के मोती चुराकर चेहरे पर प्यारी मुस्कान ला सकता है। कोई  इतना प्यार कैसे कर सकता है। मेरी आदतों को अपना गहना बनाकर अपने सांसों के तन को सजा सकता है कोई  इतना प्यार  कैसे कर सकता है।

ख़्वाब के इंतज़ार में

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 ख़्वाब के इंतज़ार में ख्वाब के इंतजार में  सारी रात गुजारी हमने।  चाहत इश्क की थी, और  की नींद से मारा मारी हमने। बुलंदियां त्याग चाहती थी की वक्त से साझेदारी हमने मुकम्मल मंजिल न हुयी की खुद से गददारी हमने। सज़ा के लिये था तैयार  की दिखायी होशियारी हमने  रच दिया सडयंत्र ऐसा  की न आने दी अपनी बारी हमने। • रामानुज "दरिया" - YourQuote.in

अर्थ को सार्थक होने दो

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  शब्द को साधक और अर्थ को सार्थक होने दो रुको अभी थोड़ा सा पथिक को पार्थक होने दो। सुना है बनते हैं वही जो भरपूर बिगड़ जाते हैं  "दरिया" खुद को अभी और निरर्थक होने दो - रामानुज "दरिया" YourQuote.in

समय से पहले जवान हुयी मैं।

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  समय से पहले जवान हुयी मैं अपनी गलियों में बदनाम हुयी मैं। न चल सका पता घर वालों को अपने मुहल्लों में सयान हयी मैं। छुप कर ही चली हर नजर से मैं पर नजरों से ही परेशान हुयी मैं। लेकर तालीम सदा ही चली में फिर भी अंधेरों में हैरान हुयी मैं। पकड़ कर हाथ उस पार चली मैं रह गयी बस कटी हुयी मयान मैं। दर्द छलका जब तेरे आगे दरिया समाज में राजनीतिक बयान हुयी मैं।

बता तेरी कौन हूँ मैं।

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 रगों में बहने वाले, लवों से पूछते हैं बता तेरी कौन हूँ मैं सुनकर तेरे सवालों को होता जा रहा  अब तो मौन हूँ मैं। ओ वक्त भी क्या वक्त था जब मैं उसका था अब तो रह गया पौन हूँ मैं। रंग भरकर जिंदगी बे रंग करने वाले देख अब भी जॉन हूँ मैं। लेकर भूल जाने का हुनर तुझमें है बेवक्त सताऊंगा, बैंक का लोन हूँ मैं। कितनी मिन्नतें की थी तुझे पाने के खातिर आज भी किया हौंन हूँ मैं।