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गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया।

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 गर हवाओं से इज़ाज़त लेनी पड़े सम्माओं को जलाने के लिये ताक पर रख दो जज़्बात अपने रखो अहसासों को भी आग में जलाने के लिए गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया ख्वाबों में भी आने के लिये सुलगा दो ये जिस्म भी अपना उसकी यादों को जलाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया उसे मिलने बुलाने के लिये तप्त कर दो धरा को भरपूर जमीं से परिंदों को उड़ाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया उनसे बातें करने के लिये जला कर राख कर दो उस पल को जिसमे ख्याल आया हाले दिल सुनाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया हुस्न -ए- दीदार करने के लिये बहा दो आँशुओं की दरिया हुस्न को भी बहाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया को कस्तियां डुबाने के लिये तू रेत का ढेर हो जा दरिया तरसे मल्लाह कस्तियां तैराने के लिये।

कुंठित मानसिकता।

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 मेरी सोंच उस आधुनिकता की भेंट नहीं चढ़ना चाहती थी जिसमें एक लड़की के बहुत से बॉयफ्रेंड हुआ करते हैं और ओ जब जिससे चाहे उससे बात करे  , जहां जिसके साथ चाहे घूमे टहले , ओ आधी रात को आये या दोपहर को , मैं आशिक हूँ तो आशिक की तरह रहूं, उसे रोकने टोकने का मुझे कोई अधिकार न रहे। अगर इसे आधुनिकता और आधुनिकता में छुपी अय्यासी को ही आज़ादी कहते हैं तो मुझे सख़्त नफ़रत है उस आज़ादी से और उसका अनुसरण करने वाले आज़ाद पंछी से। इतने दिन बाद भी कोई दिन नहीं बीतता जो उसकी यादों के बगैर गुजर जाये क्योंकि मैंने उसे चाहा है दिल की अटूट गहराई से , जिस्म की आंच से भी उसे बचा के रखा है।नफ़रतों के साये तक न पड़ने दिया है उस पर।जिंदगी की एक अनमोल धरोहर की तरह मैने उसे छुपा के रखा है उसे अपने दिल के किसी कोने में जहां सिर्फ और सिर्फ ओ रहती है उसके सिवा कोई नहीं। अपने रिस्ते के धागे और उसके अदाओं की मोती की जो प्रेम रूपी माला बनाई है उसकी इकलौती वारिस और मालिकाना हक भी सिर्फ वही रखती है। निरंतर बहते नदी की धारा की तरह एक प्रेम का प्रवाह दूंगा उसे मैं। भले इसके लिए मुझे कितना भी कुंठित क्यों न होना पड़े। हां हां...

हम खुद से मिलकर आये थे।

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  उम्मीदों  के  साये  मँडराने  लगे ओ हमें देख कर मुस्कुराने लगे। हम भी ज़रा ठिठुक गये थे चलते चलते जब ओ रुक गये ख़ामोशी से पलकें उठाये थे हम खुद से मिलकर आये थे।

इश्क़ में वापसी का कोई रास्ता नहीं होता।

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  झलक   देख  कर  फ़लक  तक  जाने  वालों इश्क़  में  वापसी  का  कोई  रास्ता नहीं होता होकर  आओ  कभी  वैश्याओं  की गलियों से वहां भोजन मिलता है कभी नास्ता नहीं होता। ख़्वाब मुकम्मल होते हैं तक़दीर की गहराइयों से सिर्फ हथेलियां घिसने से सौदा सस्ता नहीं होता। कसम  है   गर   तुम्हें   एक   बार  भी  मैं  रोकूं मरते  इश्क़  से  मेरा  कोई  वास्ता  नहीं  होता। गर समझती तुम गिड़गिड़ाहट मेरी भी सनम हमारे दरमियां इतना बड़ा हादसा नहीं होता।

कहां लिखा है।

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बिछड़ कर तुमसे तेरा होना कहां लिखा है मेरी किस्मत में अब सोना कहां लिखा है। चाहो  तो  गलियां मेरी भी रोशन हो जाये खुदा वरना अंधेरे को उजाले का होना कहां लिखा है। कही  थी  बगैर  मेरे  मर   तो   नहीं  जाओगे मेरी हालात पर तुम्हें अब रोना कहां लिखा है। मोती  की  तरह  जो  आज बह रहे हो अश्क़ मेरी आँखों का तेरा अब होना कहां लिखा है।

छुवन

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 खुद पर मुझे अब एतबार हो गया तुझे देखा तो  मुझे प्यार हो गया। भले  बाहों से बाहें न मिले  कभी पर नयनों से प्यार बेसुमार हो गया। तुम जिंदगी की सबसे अजीज़ हो तेरी छुवन से मुझे प्यार हो गया।

चाँद की ख्वाइस।

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  चाँद की ख्वाइस न रही मुझको बस पैरों की धूल  बना  लो तुम जिस पर भुलाई हो सारी दुनिया वही छोटी सी भूल बना लो तुम। सात जन्मों का साथ न चाहिये मुस्कुराने का मूल बना लो तुम हंस  के  खाई हो बहुत गोलीयां उन सबका कैप्सूल बना लो तुम।

कभी तो याद मुझे भी करोगी।

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  कभी तो याद मुझे भी करोगी देखूंगा फिर कैसे तुम रहोगी। समझता हूँ कि जान हो मेरी कभी तो मुझे आप समझोगी समझोगी जान जिस दिन मुझे देखूंगा कैसे जान के बगैर रहोगी। लत तुम्हारी है जो मुझको सनम आज दर- ब- दर मैं भटकता हूँ हो जाएगी जिस दिन लत हमारी देखूंगा जितनी सयंमित रहोगी। मज़बूर हूँ आज अपने दिल की  बेवजह सूनसान चाहतों से सनम एक बार इश्क़ तुम्हे भी हो जाये देखूंगा कैसे महबूब के बगैर रहोगी।

वापसी

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  जिम्मेदारियों  के  ऐसे  शिकंजे  में  फंसे की चूड़ी और कंगन भी हमें रोक न सके। कमाये  बहुत  टुकड़े  कागजों  के  मगर चैन - ओ - सुकून  हम  खरीद  न  सके। दबे पांव बीत गयी  छुट्टियां  दीवाली की हम नयनों को भी ठीक से सींच न सके।

उतरते गये उसके तन से कपड़े सारे।

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 उसकी यादों का बाज़ार बहुत गरम था बदन का कोना कोना बहुत ही नरम था उतरते गये उसके  तन  से  कपड़े  सारे शाम मदहोश थी,  मैं बहुत बेशरम था।

मानता हूँ की चूड़ियों में खनक बहुत थी।

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 मानता हूँ की चूड़ियों में खनक बहुत थी उलझी  हुयी  जुल्फों  में महक बहुत थी छोड़  न  देता  उसे  तो  करता  भी क्या पढ़ने की  तब  मुझमें  सनक  बहुत  थी।

ख्वाबों के महल झोपड़ी में दफन हो गये।

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 ख्वाबों  के  महल   झोपड़ी   में   दफन  हो  गये छोटी  उम्र  में  जिम्मेदारियों  के  सिकन  हो गये किसी  और  के  हालात  ही  क्या  बयां करें हम अपनी  गर्मी के कम्बल शर्दियों के कफन हो गये।

सुंदरता।

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 जितनी   तन    से   सुंदर  उतनी  ही  मन  से  सुंदर लगता  है  जैसे  कि  तुम हो  सुंदरता  का  समंदर। जितनी  आचार की सुंदर उतनी ही विचार की सुंदर लगता   है  जैसे  कि  तुम  हो सुंदरता  के अंदर सुंदर।        "दरिया"

स्टेटस

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आहट।

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शायरी ।

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    न कर खुद से इतनी नफरत ए - दरिया चाँद से  आगे  भी है एक हंसीन दुनिया तराश  डाल  खुद  को  इस   बेबसी  में बन जा मुहब्बत- ए- रोशनी का जरिया।      

शायरी।

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 गुनहगार  हैं  हम  जो  गुनाहों को बयां करते हैं समझदार  हैं  ओ  जो  हर  बार गुनाह करते हैं। मेरी  ख़ामोशी  और  तनहाइयाँ  मुझे  सताती हैं वाह रे मुहब्बत  तू कितनी अदब से पेस आती है।          

डिजिटल लव (Digital Love)

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न चेक करो इतनी डीपी मेरी वर्ना प्रोफाइल लॉक कर देंगे। गर करते रहे यूं ही मैसेज तुम तो तुम्हें भी हम ब्लॉक कर देंगे। मालूम  है  कि  आप शादी शुदा हो आते समय दरवाज़ा नॉक कर देंगे। मोहब्बत तो आप सूरत से  किये हो सीरत से हम आपको शॉक कर देंगे। पता  तो  चल  गया  है  पता तुम्हारा तेरी  गलियों  में  हम  वॉक कर लेंगे। मिल  गयी  तुम  तो  मेरी  किस्मत है वरना  वहीं हम डांस फॉक कर लेंगे।