Posts

आसमां के दिलों पर वही राज करते हैं वक्त पर जो वक्त से प्यार करते हैं।

Image
  आसमां के दिलों पर वही राज करते हैं वक्त  पर  जो  वक्त  से  प्यार  करते हैं। धूमिल  नहीं  होती  है  कभी छवि उनकी जो कर्मो के हुनर से तूफान पैदा करते है।

हुनर जीने का जाए।

Image
  जीवन की काल परिधि से निकलना  हमें  आ  जाए। हुनर  जीने  का  आ  जाए तो जीना आसान हो जाए। रोती  हुयी  आंखों  को खुशी  देना  आ  जाए मायूस  चेहरे  को   गर हँसाना  मुझे  आ  जाए तो हुनर जीने का जाए।

रास्ता खुद बन जायेगा।

Image
  तुम  कदम  तो  बढाओ रास्ता खुद बन जायेगा। तुम चलना तो सुरु करो कारवां खुद बन जायेगा। पथ मिलेंगे तुम्हें पथरीले और सर्प भी कुछ ज़हरीले तू सब पर चलकर जाएगा हौंसल रख रास्ता खुद बन जायेगा। जो छूट रहे हैं पीछे उनको  छूट  जाने दे जो रूठ रहे हैं तुझसे उन्हें  रूठ  जाने  दे लगा निशाना चिड़ियाँ की आंख पर मंज़िल चल कर आएगा तुम  कदम  तो  बढाओ रास्ता खुद बन जायेगा। छाएंगे  घने  बादल  भी कड़केंगी बिजलियां भी ये  अंधेरा  तुम्हें डरायेगा उसी में कोई जुगनू तुम्हें छोटी सी रोशनी दे जाएगा तुम   कदम   तो   बढाओ रास्ता  खुद  बन  जायेगा। परिस्थितियां तड़पेंगी और चिल्लाएंगी तेरे  आगे  मजबूरियां बौनी हो जाएंगी तू  सूरज की  तरह निकल कर आएगा तू कदम तो बढ़ा रास्ता खुद बन जाएगा। वक्त है फैसला लेने का ये वक्त बार बार न आएगा चूक गया गर तू आज जिंदगी भर पछतायेगा तू   कदम   तो   बढ़ा रास्ता खुद बन जाएगा।

जलने दो चरागों को बुझाने से फायदा क्या है।

Image
  सूरज न सही, हिस्से का अंधेरा तो मिटाएगा जलने दो चरागों को बुझाने से फायदा क्या है। महफूज़ है इश्क़ ताजमहल की संगमरमरी बाहों में फिर  रहने  दो, उसे  गिराने  से  फायदा  क्या  है। जब  आंखों  में  समाया  है  ये  बेदाग़ बदन मेरा फिर   रूह  में  उतर  जाने  से  फायदा  क्या  है। उड़ान  भर  ली  है  जिसने, उसे  उड़  जाने दो बार    बार   गिराने    से    फायदा    क्या   है। सज्जनता  अपनी   परवरिश   खुद  करती  है उसे   खोफ   दिखाने    से   फायदा   क्या  है। गिर चुका है ओ लोभ की असीमित गहराई में गिरी  हुयी  चीज़ को उठाने से फायदा क्या है।

आप यूं ही मुस्कुराती रहना।

Image
  खुशियों      का    भंडार   है नई    रंगत    नई   बहार   है आप  यूं  ही मुस्कुराती रहना हमारी  तरफ से ये उपहार है। जिंदगी  इतनी  मकबूल  हो की   हर  दुआ   कबूल   हो चाहें  तो  आसमां  झुका  ले अपनी सल्तनत का वसूल हो। जिंदगी  को  ऐसी  ग़ज़ल दें गमों को चुटकी  में मसल दें किस्मत   बुलंद   हो   इतनी की हवाओं का रुख बदल दें। ममता का ऐसा आंचल मिले, की आंखों में चमकता काजल मिले हसरतें  इतनी  जवान  हों, की मुटठी में सिमटता बादल मिले।

कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है।

Image
  दवा   को   दावे    के    साथ   और पानी  का   पाचन  करा  सकता  है कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है। सुबह  चुम्बन के साथ आंखें खोलकर रात को मीठी यादों संग सुला सकता है कोई  इतना  प्यार कैसे कर सकता है। मन  की भूख  को  चेहरे के  प्रताप से तन की , आंखों से सांत करा सकता है। कोई  इतना  प्यार कैसे कर सकता है। जिंदगी की  इस  बेजोड़ ठिठुरन में भी गर्म कम्बल का अहसास करा सकता है कोई  इतना  प्यार  कैसे कर सकता है। पलकों से  आँशुओँ के मोती चुराकर चेहरे पर प्यारी मुस्कान ला सकता है। कोई  इतना प्यार कैसे कर सकता है। मेरी आदतों को अपना गहना बनाकर अपने सांसों के तन को सजा सकता है कोई  इतना प्यार  कैसे कर सकता है।

ख़्वाब के इंतज़ार में

Image
 ख़्वाब के इंतज़ार में ख्वाब के इंतजार में  सारी रात गुजारी हमने।  चाहत इश्क की थी, और  की नींद से मारा मारी हमने। बुलंदियां त्याग चाहती थी की वक्त से साझेदारी हमने मुकम्मल मंजिल न हुयी की खुद से गददारी हमने। सज़ा के लिये था तैयार  की दिखायी होशियारी हमने  रच दिया सडयंत्र ऐसा  की न आने दी अपनी बारी हमने। • रामानुज "दरिया" - YourQuote.in

अर्थ को सार्थक होने दो

Image
  शब्द को साधक और अर्थ को सार्थक होने दो रुको अभी थोड़ा सा पथिक को पार्थक होने दो। सुना है बनते हैं वही जो भरपूर बिगड़ जाते हैं  "दरिया" खुद को अभी और निरर्थक होने दो - रामानुज "दरिया" YourQuote.in

समय से पहले जवान हुयी मैं।

Image
  समय से पहले जवान हुयी मैं अपनी गलियों में बदनाम हुयी मैं। न चल सका पता घर वालों को अपने मुहल्लों में सयान हयी मैं। छुप कर ही चली हर नजर से मैं पर नजरों से ही परेशान हुयी मैं। लेकर तालीम सदा ही चली में फिर भी अंधेरों में हैरान हुयी मैं। पकड़ कर हाथ उस पार चली मैं रह गयी बस कटी हुयी मयान मैं। दर्द छलका जब तेरे आगे दरिया समाज में राजनीतिक बयान हुयी मैं।

बता तेरी कौन हूँ मैं।

Image
 रगों में बहने वाले, लवों से पूछते हैं बता तेरी कौन हूँ मैं सुनकर तेरे सवालों को होता जा रहा  अब तो मौन हूँ मैं। ओ वक्त भी क्या वक्त था जब मैं उसका था अब तो रह गया पौन हूँ मैं। रंग भरकर जिंदगी बे रंग करने वाले देख अब भी जॉन हूँ मैं। लेकर भूल जाने का हुनर तुझमें है बेवक्त सताऊंगा, बैंक का लोन हूँ मैं। कितनी मिन्नतें की थी तुझे पाने के खातिर आज भी किया हौंन हूँ मैं।

मालूम न था इस कदर हो जाऊंगा मैं।

Image
  मालूम न था इस कदर हो जाऊंगा मैं अपनों के लिये ही ज़हर हो जाऊंगा मैं ओढ़  लूंगा  मैं अय्याशियों के लिबास फिर  फ़ैशन  का  शहर हो जाऊंगा मैं। दिन  ब  दिन  दूषित होता जा रहा हूं लगता  है  नाला - नहर हो जाऊंगा मैं। उमस  भर  गयी  रिश्तों  में  इतनी कि लगता है जून के दोपहर हो जाऊंगा मैं। मेरे   किरदार  में   ओ चमक  न  रही कि  बनकर  तिरंगा  फहर  जाऊंगा  मैं। आवाज़ कितनी भी आये मन्दिर-ओ-मस्जिद से लगता   है   कि   अब   बहर  हो   जाऊंगा   मैं।

तो कोई बात हो।

Image
में पुकारूं आपको ओर आप मिलने चले आओ          तो कोई बात हो। अधूरे ख्वाब में भी गर आप मुक्कमल हो जाओ          तो कोई बात हो।  सूखी दरिया में दो बूंद प्यार के डाल जाओ           तो कोई बात हो। बेचैन बाहों को भी कभी पनाह दिलाओ           तो कोई बात हो। सिसकती आंखों को भी कभी इक झलक दिखाओ           तो कोई बात हो। जिस्म को चाह कर भी तुम रूह में उतर जाओ           तो कोई बात हो। जवानी का बूढ़ा खत हूँ मैं तुम पढ़ के मुस्कुराओ            तो कोई बात हो। भागता फिरता हूँ तेरे पीछे कभी तुम भी मुड़ जाओ             तो कोई बात हो।  

आप जो दिल में हिल गये।

Image
  पुर्जे पुर्जे शरीर के हिल गये आप जो हमसे मिल गये। कुछ अमीरी सी आ गयी है आप जो दिल में हिल गये। आंखें अब बात करती हैं ओंठ जब से सिल गये । प्रयास बर्बादी का ही है जो सत्ता विपक्ष मिल गये । मिटाने की अब साज़िस है मंत्री और दरबारी मिल गये।

जब से तुम मिली हो सनम।

Image
जब से तुम मिली हो सनम दरिया में रवानी सी लगती है ख़ामोश लव और आंखों में खुशियों की पानी सी लगती है। जब से तुम मिली हो सनम जिंदगी कहानी सी लगती है मुक्कमल ख्वाब हो गये औऱ बुढ़ापा जवानी सी लगती है।  

कोशिश-ए-अहसास।

Image
ये  हवा  तू  उसके  पास  जाना जुल्फों को उसके ज़रा सहलाना आंखों  में  इक   फूंक  लगाकर मेरे  होने  का  अहसास  कराना। ये खुशबू तू भी उसके पास जाना सांसों  में  उसके  ज़रा घुल जाना कैद   कर    लाना    साथ   अपने उसकी महक का अहसास कराना। ये   काज़ल   उसके   पास   जाना बनकर सुरमा आंखों में लग जाना ज़रा  सा  साथ   अपने   ले  आना मेरी आँखों में उसकी छवि दे जाना रामानुज "दरिया"  

जिंदगी - ए- राह में क्या - क्या नहीं देखा।

Image
  जिंदगी - ए- राह में क्या - क्या  नहीं  देखा रोती  खुशियां  और  विलखते  गम  देखा। यूं  तो  बहारों  का  मौसम  खूब रहा मगर अपने  हिस्से  में  इसका असर कम देखा। छोड़  रही  थी   स्याह,   साथ   कलम  की तभी  किस्मत  को  वहां  से  गुजरते  देखा। हवा    की    तरह   उनको    गुजरते   देखा फिर  उम्मीदों  को   अपने   बिखरते  देखा। लत  लगी  थी  साहब  तो  लगी ही रह गयी हमने  खामोशियों  को  दिल में उतरते देखा।

गर देखना ही है तो अपने आप को देखिये।

Image
  दुखती   हथेलियों   से   जिंदगी  के   ताप  देखिये गर   देखना  ही  है  तो  अपने  आप  को  देखिये। कोई  आयेगा  नहीं  हिस्से  का   अंधेरा   मिटाने उठाइये  चरागों  को  और  उसका  ताप  देखिये। ज़रूरत  नहीं  किसी  के  पैरों  में  गिड़गिड़ाने की उठाइये कदम और मंज़िल तक की नाप देखिये। ये  दुनिया  तुम्हें  हंसीन सपनों जैसी दिखायी देगी बस  एक  बार  बदलकर खुद अपने आप देखिये। इस   दौर  में  गली  गली  नुमाइशें करती फिरती है यकीं  नहीं  होता,  आप  द्रोपदी  का  श्राप देखिये। असुरों  के  संगत  में  बनकर  देवता  रह सकते हो बस  दृढ़  संकल्प  के  साथ  ध्रुव  का  जाप देखिये। गधे  और   घोड़े  में  फ़र्क  दिख  जायेगा  तुम्हें...

फ़ना उसी दिन मुझे मेरे खुदा कर देना।

Image
  उसके ख्वाबों से एक दिन जुदा कर देना फ़ना उसी दिन मुझे मेरे खुदा कर देना। ख़्याल रहे कि उसकी परछाईं भी न पड़े दरिया  खुद  को   इतना  जुदा  कर देना। झोपड़ी  महलों  से  भी  सुंदर  लगने  लगे मोहब्बत  कुछ  ऐसी  ही  अता  कर  देना। तुम्हें  चाहे  न  चाहे  दरिया  उसकी  मरज़ी मग़र दिल अपना उसी पर फ़िदा कर देना। महसूस हो कि प्रेमिका भी साथ नहीं देगी फिर ख़ुद को भी तुम शादी शुदा कर देना।

गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया।

Image
 गर हवाओं से इज़ाज़त लेनी पड़े सम्माओं को जलाने के लिये ताक पर रख दो जज़्बात अपने रखो अहसासों को भी आग में जलाने के लिए गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया ख्वाबों में भी आने के लिये सुलगा दो ये जिस्म भी अपना उसकी यादों को जलाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया उसे मिलने बुलाने के लिये तप्त कर दो धरा को भरपूर जमीं से परिंदों को उड़ाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया उनसे बातें करने के लिये जला कर राख कर दो उस पल को जिसमे ख्याल आया हाले दिल सुनाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया हुस्न -ए- दीदार करने के लिये बहा दो आँशुओं की दरिया हुस्न को भी बहाने के लिये। गर इज़ाज़त लेनी पड़े दरिया को कस्तियां डुबाने के लिये तू रेत का ढेर हो जा दरिया तरसे मल्लाह कस्तियां तैराने के लिये।

कुंठित मानसिकता।

Image
 मेरी सोंच उस आधुनिकता की भेंट नहीं चढ़ना चाहती थी जिसमें एक लड़की के बहुत से बॉयफ्रेंड हुआ करते हैं और ओ जब जिससे चाहे उससे बात करे  , जहां जिसके साथ चाहे घूमे टहले , ओ आधी रात को आये या दोपहर को , मैं आशिक हूँ तो आशिक की तरह रहूं, उसे रोकने टोकने का मुझे कोई अधिकार न रहे। अगर इसे आधुनिकता और आधुनिकता में छुपी अय्यासी को ही आज़ादी कहते हैं तो मुझे सख़्त नफ़रत है उस आज़ादी से और उसका अनुसरण करने वाले आज़ाद पंछी से। इतने दिन बाद भी कोई दिन नहीं बीतता जो उसकी यादों के बगैर गुजर जाये क्योंकि मैंने उसे चाहा है दिल की अटूट गहराई से , जिस्म की आंच से भी उसे बचा के रखा है।नफ़रतों के साये तक न पड़ने दिया है उस पर।जिंदगी की एक अनमोल धरोहर की तरह मैने उसे छुपा के रखा है उसे अपने दिल के किसी कोने में जहां सिर्फ और सिर्फ ओ रहती है उसके सिवा कोई नहीं। अपने रिस्ते के धागे और उसके अदाओं की मोती की जो प्रेम रूपी माला बनाई है उसकी इकलौती वारिस और मालिकाना हक भी सिर्फ वही रखती है। निरंतर बहते नदी की धारा की तरह एक प्रेम का प्रवाह दूंगा उसे मैं। भले इसके लिए मुझे कितना भी कुंठित क्यों न होना पड़े। हां हां...