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Happy Promise Day.जान दे देंगे पर जाने नहीं देंगे।

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झूठे वादे हम सजाने नहीं देंगे जान दे देंगे पर जाने नहीं देंगे। इश्क के ऐसे फ़साने नहीं देंगे आँखों को आंशू गिराने नहीं देंगे। नई मुस्कान तुझे न दे सके तो क्या पुरानी मुस्कुराहट को हटाने नहीं देंगे। रस्म है यहां रुक्सत में रोना 'दरिया' भरी आंखों से तुझे जाने नहीं देंगे। मांगा था इक रोज़ खुदा से तुझे बोले 'दरिया' ऐसे हम तुझे किनारे नहीं देंगे। याद भले न करे तू मुझे कभी भी खुद को तुझे हम भुलाने नहीं देंगे। कितनी भी सिद्दत से चाह ले कोई हमें तेरी यादों के सिवा किसी को आने नहीं देंगे।

इश्क ओ है,बेंड़ियों को भी तूर देता है जो।

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न चाहते हुये भी कुछ काम कर देता है ओ ऐसे ही जिंदगी को ताक पर रख देता है ओ। नशीब की फिराक में रहते हैं अक्सर लोग साख मेहनत की टांग ताक पर देता है जो। चाहो तो कभी किसी को टूटकर 'दरिया' इश्क ओ है,बेंड़ियों को भी तूर देता है जो।

इतनी अहमियत देने के लिये thanks। Happy Teddy Day.

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Happy Teddy Day Hello कौन, अच्छा तो अब कौन मतलब की पहचान भी नहीं पाये, ऐसे ही धीरे धीरे आप मुझे भी भूल जाएंगे।अरे नहीं यार ,क्या है न कि मैंने हेड फ़ोन लगा रखा है और फोन जेब मे रखा है इसलिए पता नही चल पाया,और बताओ कैसी हो तुम सफाई देते हुये आशु ने पूछा।आशी ठीक हूँ आप बताओ कैसे हो, मैं भी मस्त हूँ। क्या बात है आजकल कॉलेज नहीं आ रहे हो, पढ़ के पास हो गए क्या ,आशी ने मजाकिया लहज़े में पूंछा। नहीं यार, मैं तो माता रानी के दरबार आया हूँ, बताया तो था आपसे।अरे हाँ यार मैं तो भूल ही गयी थी और बताओ पहुंच गए ठीक ठाक। हाँ पहुंच भी गया हूँ और दर्शन भी कर लिया है अब निकलने की फिराक में हुँ। अच्छा तो मेरे लिए क्या ला रहे हो आशी ने बड़ी उत्सुकता से पूंछा। आशु- जो आप कहें, अरे नहीं मैं क्या कहूँ जो आपके समझ मे आये ले आना ये कहते हुये आशी ने फोन काट दिया। आशु के लिये यह काफी मुश्किल का काम है क्योंकि यदि बता दिया होता तो आसान रहता। आशु सोंचने लगे कि अब क्या करें जुड़ा ले लूं बाल में लगाने वाला या फिर सुरमा ले लूं आंख में लगाने वाला अंततः परिणाम यह लिकला कि एक लॉकेट ले लें जिसे आसानी से पहन सकेंगी। अग...

Happy Propose Day

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Happy propose day क्या बात है आज तो एकदम कहर ढा रही हो, नहीं ऐसा तो कुछ भी नही है अपनी उंगलियों को जुल्फों में पिरोते हुये बोली।अरे यार मैं तो जल्दी जल्दी में कुछ कर नहीं पायी बस ऐसे ही कपड़ा डाला और चल दिया। हां जो भी हो लेकिन बहुत खूबसूरत लग रही हो अरे जाने भी दो आपको तो ऐसा ही लगता है पलकें गिरा के आशी शर्माते हुये बोली। वाकई में आज ओ बहुत खूबसूरत लग रही थी क्योंकि यह स्टूडेंट लाइफ का सबसे कड़वा अनुभव है कि जिसे आप रोज यूनिफार्म में सामान्यतः देखते हैं और अचानक से ओ फॉर्मल ड्रेस में आ जाये तो देख कर दंग रह जाना लाज़मी है। यह आशु के साथ पहली बार हो रहा था। मन्दिर की सीढ़ियां चढ़ते वक्त आशु दुपट्टे को पकड़ने ही जा रहे थे ( जो सूट सलवार पर आज डाल कर आयी थी) कि तभी आशी ने आशु के हाथो को मजबूती से पकड़ कर मन्दिर की फेरियां करने लगी थी। पुजारी- बेटा तुम तो हमेशा अकेले आती थी आज ये तुम्हारे साथ लड़का कौन है।आशी- पुजारी जी ये मेरे कॉलेज के दोस्त हैं आशी ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया और फेरे लगाते रहे। फेरे पूरे करने बाद आशी ने चंदन लिया और आशु के ललाट पर हलका से लगाया ओर फिर पुजारी जी ने दोनों ...

Happy Rose Day

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Happy Rose Day बसंत ही तो लगा था जब हम मिले थे गोण्डा के उस पावन स्थल पर जिसे हम नूरामल मंदिर के नाम से जानते हैं, ऐसे ही हवाएं गुन गुनाती थी चिड़ियाँ कलरव करके मन को मोह रही थी। हो भी क्यों न पहली बार किसी ने उंगलियों को इस कदर स्पर्श किया था, छूने और पकड़ने को तो हजारों ने पकड़ा होगा लेकिन उसके स्पर्श का अहसास किसी और में न हुआ था। यह सच है कि यदि हम कुछ गलत करने लगते हैं तो हमारे हाथ पावँ फूलने लगते हैं पर इसको भी नकारा नहीं जा सकता है कि अच्छे काम की सुरुवात में भी हालात कुछ ऐसे ही होते हैं। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 उसने फोन करके अचानक बताया था कि मात्र 10 मिनट का समय है तुम्हारे पास क्योंकि मैं घर से निकल चुकी हूँ मन्दिर के लिए और मैं कैम्पस में बिना साधन के घूम रहा था। था तो मेरे लिए चुनौती का ही विषय पर मेरा परम् मित्र मुझे दिख गया था और मैने अपने वज़न को ताक पर रख कर उससे गाड़ी मांग ली थी। दोस्त था लेकिन कमीना वाला अच्छा दोस्त था जो बिना किसी सवाल जबाब के गाड़ी दे दी थी। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 मैं जैसे तैसे तो वहां पहुंच गया था लेकिन अंदर का दृस्य था जो मैं बस द...

जिंदगी झंड थी झंड ही रह गयी।

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जितनी  भी  ख्वाइशें  थी  दरिया वक्त  की  संदूक  में  बंद रह गयी जिंदगी झंड थी झंड ही रह गयी। न थी पहले  न  कोई  बाद आयी उदासी  जो  दिल में उतर आयी। मैनें   चाहा  भी  तो   क्या   उसे उम्रभर ओ अनजान ही रह गयी जिंदगी झंड थी झंड ही रह गयी। मान  लूंगा  खुदा  शक्ती तुम्हारी बन  जाये  जो  इक  बार हमारी वर्ना  फर्क क्या कब्र और तुझमें अगरबत्तियां पहले भी जलती थी और अब भी जलती ही रह गयी जिंदगी झंड थी झंड ही रह गयी।

Happy जिंदगी

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रख दो ताक पर जिंदगी के अरमान सारे जिम्मेदारियों तले दब गये सपने हमारे। कौतूहल बस कहता था जो माँ से कभी हंस कर लाते थे पिता जी खिलौने सारे। कमा कर भी नहीं खरीद पाता हूँ जो एक आंशू गिराते, मिल जाते थे कपड़े सारे।

मैं मरहम हूं रिश्तों का।

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छोड़  दे  तरासना  ये  वक्त  मुझे, मैं   मूरत   नहीं   बन  सकता। ठोकरें  कितनी  भी  दे  दे  मुझे, मैं चाहतों की सूरत नही बन सकता। मैं   मरहम   हूँ   रिश्तों   का दर्द-ए-घाव नहीं बन सकता। तू वर्तमान तो कभी अतीत बन सकता है पर  मैं  मीठा " दरिया" हूँ   'ये वक्त' कभी खारा समन्दर नहीं बन सकता।      "  दरिया "

हिंसाब होकर रहेगा।

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उठी है कलम तो, हिंसाब होकर रहेगा। मिलेगी सुरक्षा वर्दी को साथ वकीलों के , न्याय होकर रहेगा। चीखता रहे जनमानस भले ही ऑक्सीजन खातिर प्रदूषण प्रकृति के साथ अब पूर्णतयः होकर रहेगा। लाल किले से दहाड़ने वाला शेर भले ही मौन हो जाये, बदली बन प्रदुषण धरा पे छा जाए अंगारें उठती रहें, भले ही वकीलों के हाहाकार से भले दिल्ली वाला मफ़लर गले मे ठिठुर कर रह जाये लेकिन उठी है कलम तो, हिसाब होकर रहेगा। 'दरिया'

याद तुम्हारी आती है।

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रिम झिम बारिस के फुहारों से आते  जाते  इन  त्योहारों    से याद तुम्हारी आती है। नुक्कड़     के    नक्कारों  से बजते ढोलक और नगारों से याद. तुम्हारी आती है। ओलों  की  मारों  से सर्दी  की लाचारों से याद तुम्हारी आती है। जीवन  की  हारों  से व्यथित  मन मारों से याद तुम्हारी आती है। ओठों  की  धारों  से जिस्म की अंगारो से याद तुम्हारी आती है। समर्थन और विरोधों से विकास की अवरोधों से याद तुम्हारी आती है।

इंशानियत -ए- तालीम की।

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इसे कुदरत का संतुलन नहीं तो और क्या कहेंगे जनाब। निशाना भी खुद ही लगाते हैं और गोलियां भी खुदी खाते हैं। काश पलटे होते कुछ पन्ने इंशानियत -ए- तालीम की बुलंदियां चमचमाती रहती न चाटते धूल-ए-जमीन की।

ग़ज़ल अपनी आवाज़ में-1

स्त्री जीवन।

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                    Image google se करवाया था फोन किसी से उसने,और यहां गुमसुदगी की रिपोर्ट लिखी जा रही थी । ठीक से रो भी नही पा रही थी हुये सितम की दास्तां सुना रही थी। दो दिन तक होश नहीं आया था जाने कैसे -कैसे उसको सताया था दर्द संभालने की कोशिश कर रही थी रो-रो के अपनी माँ से कह रही थी। सास हाथ से ससुर लात से मारते हैं मां पति देव तो हर बात पर मारते हैं। तीन बेटी हुयी पर बेटा नहीं हुआ मां इसी वजह से घरवाले धिक्कारते हैं। कलमुंही, कर्मजली जाने कैसे-2 बुलाते हैं कभी सिगरेट तो कभी चमटे से जलाते हैं। लाठी डंडे भी उनको हल्के लगते हैं मां जब मुँह पे बूट रख के मारने लगते हैं। हाथ जोडूं कितना भी मैं गिड़गिडाऊं मां कर निर्वस्त्र, ज़ख्म पर नमक रगड़ते हैं। छोड़कर स्वार्थी दुनिया जा रही हूँ मां आज मैं अपना वजूद मिटा रही हूँ। क्या -क्या जतन नहीं किया मारने का खाने में तो कभी पीने में जहर दिया मां पता नहीं कैसे हर बार बचती रही मां सांसों की डोर न इतनी सस्ती रही मां। पर अब मैं और नहीं लड़ पाऊँगी लकीरों को न हाथों स...

वक्त।

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दर किनार कर देना ये खुदा जब दरबार तेरे  मैं आऊंगा इंतजार कर ले उस दिन का ऐसा वक्त मैं ठुकरा जाऊंगा। मानवता नंगी हो गयी खुदा तेरे इस बनावटी बाजार में तिल-तिल मरता हूँ मैं खुदा देख बच्चियों को अत्याचार में।

व्रत करवाचौथ का रह जाती है।

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आंशु मोती बनकर बरस जाती है कलम उठते,याद तुमारी आती है। अभी तक शादी नहीं कि उसने व्रत करवाचौथ का रह जाती है। प्यार में सब कुछ जायज है 'दरिया' वक्त परे पत्ती फूल बन जाती है। सांसों में थकान सी होने लगती है माशूका, नजरों से दूर हो जाती है।

बस यही हर बार पूंछती थी।

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बस  यही  हर  बार  पूंछती  थी जो लिखते हो कहानी किसकी है। करते  मुहब्बत  मुझसे  हो  फिर अंगूठी    निशानी  किसकी     है। दवा  भी  तुम दुआ भी तुम फिर छटपटाती    जवानी  किसकी  है। याद   नहीं   करते     हो   फिर फ़िज़ा   में  रवानी  किसकी   है। अब मीडिया भी अपने हाथ में है हस्ती बनानी, मिटानी किसकी है। बजबजाती नालियों से जान लो गाँव    में  प्रधानी   किसकी   है।

मेरे पास चली आना।

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तुम  धन   से  न  सही और  तन  से  न  सही मन   से   चली  आना कभी  दिल  धड़के तो मेरे  पास  चली आना। एक    दिन    न    सही, एक     रात    न    सही बस  दो  पल   के  लिए मेरे  पास  चली  आना। अंदर  चलता  द्वंद  मिले दरवाज़ा  भी  बंद  मिले खिड़की  के   ही  सहारे मेरे  पास   चली  आना। ऊब  जाना  रिश्तों  से  तुम छोड़  घरबार  चली  आना इंतजार   रहेगा    ता    उम्र बस  इक  बार चली आना। सुखों   की   जरूरत   हो बेशक   तुम   मत   आना खुशियों  की  जरूरत  हो मेरे   पास   चली   आना। अरसे      बीत     गए तुझसे...

जी चाहता है, जी भर के देखूं उसे।

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बेशुध    हवा  को   बवंडर   बना  देना हो सके ,  'दरिया'  समंदर  बना  देना। भ्रस्ट  रोग   ने    खोखला    कर दिया हो सके, फौलादी  अंदर   से बना देना। जी  चाहता है, जी   भर  के  देखूं उसे हो सके, मूरत  मेरे  अंदर  बना   देना। मेरी  रूह  का  खज़ाना  बस  वही  है हो सके, सौ  ताले  के अंदर छुपा देना। लग जाये न कहीं उसको नजर भी मेरी हो सके, माथे  पे टीका सुंदर लगा देना। जब  वक्त  तेरा हो, ध्यान से सुनो दरिया हो सके,किनारों को भी अंदर समा लेना। चाह  कर  भी नहीं रोंक पाता हूँ खुद को हो सके,मोहब्बत-ए-तरफ़ा का अंतर बता देना। जख़्मी दिल, किसी का नही होता 'दरिया' हो सके, सहारा  देकर  अंदर  बुला लेना।

हम उस देश के वासी हैं।

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जहां    पेशाब    करना    मना   है वहीं    करते   मूत्र    निकासी    हैं हम     उस    देश    के    वासी  हैं। गरीबी  से  तड़पता  बचपन   जहां चुपड़  के  मिलती   रोटी  बासी  है हम  उस    देश    के   वासी    हैं। खिलाफ़ भ्र्ष्टाचार के आंदोलन होता लिप्त  अधिकारी   और  चपरासी हैं हम    उस    देश    के    वासी   हैं। कट्टा  दौलत  पर  राजनीति   टिकी शामिल  भै या   बबुआ   चाची    हैं हम    उस    देश    के    वासी    हैं। नशेड़ी   'कबीर खान'   तांडव करती सुपर 30   जैसी  फ्लॉप  हो जाती है हम      उस    देश...

तड़पी मैं, रात खुद से हुयी।

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जब  भी  बात  तुझ  से  हुयी तड़पी  मैं, रात  खुद  से  हुयी। जब  भी  घन  धरा  की  हुयी रोयी  मैं, बारिस  खुद से हुयी। जब  भी  जवानी  प्रेम में हुयी रही  मैं, कहानी  खुद  से हुयी। जब   भी   छुआ   उसने  मुझे भड़की   मैं, पानी  पानी  हुयी। जब  भी नयनों में लड़ाई हुयी जीत  गयी  मैं, हारी हारी हुयी।